कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में महिला की ECG रिपोर्ट पर पुरुष का इलाज कर दिया,जिसके चलते पुरुष मरीज की मौत हो गयी,एक बेटी ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए यह दावा किया है कि गलत मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर इलाज करने से उसके पिता की मौत हो गई,रागिनी जाधव नाम की युवती ने अब न्याय और जांच की मांग को लेकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है,उसका कहना है कि कोई उनकी पुकार नही सुन रहा है,अब सिर्फ मुख्यमंत्री मामा डॉ मोहन यादव जी पर ही भरोसा है।
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दरअसल यह पूरा मामला बीती 18 अप्रैल 2026 का है,जब गुढ़ा लश्कर क्षेत्र के रहने वाले दिलीप जाधव को घबराहट होने पर JAH अस्पताल के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था,परिजनों का आरोप है कि भर्ती के बाद डॉक्टरों ने ECG जांच करवाई, लेकिन रिपोर्ट में किसी अन्य महिला का नाम और उम्र प्रिंट थी। हैरानी की बात यह है कि डॉक्टरों ने इस गंभीर गलती को नजरअंदाज कर उसी गलत रिपोर्ट के आधार पर इलाज शुरू कर दिया,जिससे कुछ समय बाद मरीज की हालत बिगड़ती गई,डॉक्टर्स ने मरीज को मिर्गी आने की बात कहकर न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट लें जाने के लिए कहा,लेकिन जब तक वह पहुँचते मरीज ने एम्बुलेंस में ही दम तोड़ दिया। जिसे बाद में अस्पताल द्वारा ‘हार्ट अटैक’ बताया गया।
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मृतक अपने घर का इकलौते कमाने वाले सदस्य था,उन पर उनके तीन बच्चों के अलावा एक नेत्रहीन चाचा और मानसिक रूप से दिव्यांग बुआ की जिम्मेदारी भी थी,ऐसे में अब मृतक की बेटी रागिनी और हलचल जाधव अस्पताल द्वारा दी गयी गलत ECG रिपोर्ट और रिकॉर्ड के साथ न्याय की आस में भटक रहे है। उनका कहना है कि यह केवल एक गलती नहीं बल्कि अस्पताल प्रशासन, लैब टेक्नीशियन और संबंधित डॉक्टरों की घोर लापरवाही है। अगर समय पर सही रिपोर्ट आती और सही इलाज मिलता, तो उनके पिता की जान बचाई जा सकती थी।
पीड़ित बेटियों ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से गुहार लगाई है,उनका कहना है कि अब उन्हें सिर्फ डॉ मोहन यादव जो कि लाडली बहनो के भाई है,यानी उनके मामा है,सिर्फ उन्हीं पर भरोसा है। मामा डॉ मोहन यादव जी से उन्होंने अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच, दोषी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और आर्थिक सहायता की मांग की है। बहरहाल इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

