बेगूसराय‌। बिहार की औद्योगिक राजधानी बेगूसराय अब शिक्षा और फैशन जगत में भी अपनी धाक जमाने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में राज्य के दूसरे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) की स्थापना पर मुहर लगा दी गई है। यह निर्णय न केवल युवाओं के लिए करियर के नए अवसर लेकर आया है, बल्कि उत्तर बिहार के विकास में भी एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है।

​20 एकड़ जमीन का नि:शुल्क हस्तांतरण

​सरकार ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए बरौनी अंचल के मल्हीपुर मौजा में 20 एकड़ जमीन चिन्हित की है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस बेशकीमती जमीन को उद्योग विभाग को नि:शुल्क और स्थायी रूप से हस्तांतरित करने की स्वीकृति दे दी है। यह कदम दर्शाता है कि बिहार सरकार शिक्षा और औद्योगिक बुनियादी ढांचे को कितनी प्राथमिकता दे रही है।

​हर्ल टाउनशिप से शुरू होगी शैक्षणिक यात्रा

​मल्हीपुर में स्थायी परिसर बनने तक छात्रों की पढ़ाई बाधित नहीं होगी। अगले दो वर्षों तक संस्थान का संचालन HURL (हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड) टाउनशिप से किया जाएगा। इसके लिए लगभग 90 हजार वर्ग फुट जगह सुरक्षित की गई है। लक्ष्य रखा गया है कि 2028 तक छात्र अपने अत्याधुनिक स्मार्ट कैंपस में शिफ्ट हो सकें, जिसमें हॉस्टल, डिजाइन लैब और विशाल ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं होंगी।

​सिल्क और टेक्सटाइल को मिलेगी वैश्विक पहचान

​पटना के बाद बेगूसराय में NIFT का आना जिले की प्रोफाइल बदल देगा। इसका मुख्य फोकस स्थानीय हैंडीक्राफ्ट, हैंडलूम और एग सिल्क पर होगा। इससे न केवल स्थानीय बुनकरों को वैश्विक मंच मिलेगा, बल्कि बेगूसराय, भागलपुर की तर्ज पर ‘सिल्क सिटी’ के रूप में उभरेगा। संस्थान के निर्माण और संचालन से क्षेत्र में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे।

​विकास का ‘मील का पत्थर’: गिरिराज सिंह

​स्थानीय सांसद और केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे बिहार के विकास में ‘मील का पत्थर’ बताया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और नवाचार से समृद्ध होता बिहार अब नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है। यह डबल इंजन सरकार के संकल्प का परिणाम है कि हमारे प्रतिभाशाली बच्चों को अब विश्वस्तरीय कौशल सीखने के लिए दिल्ली या मुंबई का रुख नहीं करना पड़ेगा।

​कनेक्टिविटी का मिलेगा लाभ

​बरौनी की बेहतर रेल और सड़क कनेक्टिविटी के कारण यह स्थान NIFT के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जा रहा है। बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) को इस भव्य कैंपस के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जिसमें केंद्र और राज्य दोनों की वित्तीय भागीदारी होगी।