हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। जननायक जनता पार्टी (JJP) के युवा नेता दिग्विजय सिंह चौटाला और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल की मुलाकात ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी नगर निकाय चुनाव (Civic Polls) से पहले दोनों दल हाथ मिला सकते हैं।

चंडीगढ़। प्रदेश की सियासत में इन दिनों एक तस्वीर ने चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। जननायक जनता पार्टी के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) से उनके आवास पर मुलाकात की। दिग्विजय ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की फोटो साझा करते हुए बताया कि उन्होंने केजरीवाल के साथ हरियाणा में बिगड़ती कानून व्यवस्था और ‘बढ़ते जंगलराज’ पर गंभीर चर्चा की है। हालांकि, इसे एक शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस मुलाकात के पीछे नगर निकाय चुनावों को लेकर कोई बड़ी खिचड़ी पक रही है।

पुराने रिश्तों की याद और नए समीकरण

JJP और AAP के बीच नजदीकियों का इतिहास पुराना है। साल 2019 के जींद उपचुनाव में आम आदमी पार्टी ने दिग्विजय चौटाला का अप्रत्यक्ष समर्थन किया था। हालांकि 2024 के चुनावों में दोनों दल स्वतंत्र रूप से लड़े, लेकिन मौजूदा संगठनात्मक चुनौतियों (Organizational Challenges) को देखते हुए अब एक बार फिर गठबंधन (Alliance) की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। हरियाणा में बीजेपी और कांग्रेस के वर्चस्व को चुनौती देने के लिए दोनों दल एक नया मोर्चा खोलने की रणनीति बना सकते हैं। माना जा रहा है कि अगर औपचारिक गठबंधन नहीं भी हुआ, तो भी दोनों पार्टियां एक-दूसरे को नुकसान न पहुंचाने की गुप्त रणनीति (Secret Strategy) पर काम कर सकती हैं।

नगर निकाय चुनाव बन सकता है लिटमस टेस्ट

हरियाणा में जल्द ही नगर निकाय चुनाव होने हैं और दिग्गजों की यह गलबहियां इस चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर सकती हैं। वर्तमान में दोनों ही पार्टियां राज्य में अपनी खोई हुई जमीन तलाश रही हैं। ऐसे में केजरीवाल और चौटाला की यह मुलाकात कार्यकर्ताओं में नया जोश भर सकती है। फिलहाल दोनों ही तरफ से आधिकारिक रूप से गठबंधन की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन राजनीति में ऐसी मुलाकातों के गहरे अर्थ होते हैं। अब देखना होगा कि क्या ‘झाड़ू’ और ‘चाबी’ एक साथ मिलकर हरियाणा की सत्ता के नए द्वार खोलने में कामयाब हो पाते हैं या नहीं।