पटना। ​बिहार पुलिस में सोशल मीडिया के बढ़ते क्रेज और रील बनाने के शौक पर अब विभाग ने सर्जिकल स्ट्राइक शुरू कर दी है। ताजा मामला पूर्णिया का है, जहां महिला थानाध्यक्ष (SHO) शबाना आजमी को पुलिस की वर्दी में रील बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है।

​चेतावनी के बाद भी नहीं बदला रवैया

​पूर्णिया की एसपी स्वीटी सहरावत ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए साफ किया कि वर्दी की गरिमा के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शबाना आजमी को पहले भी सोशल मीडिया एक्टिविटीज के लिए चेतावनी दी गई थी, लेकिन उनके आचरण में सुधार न होने पर यह सख्त कदम उठाया गया है। विभाग ने इसे अनुशासनहीनता और सर्विस रूल्स (SOP) का स्पष्ट उल्लंघन माना है।

​कुर्सी पर दादा को बिठाने से भी विवादों में रहीं

​शबाना आजमी का विवादों से पुराना नाता रहा है। करीब 9 महीने पहले वे तब चर्चा में आई थीं, जब उन्होंने अपनी सरकारी कुर्सी पर अपने दादाजी को बिठाकर तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की थीं। हालांकि भावुक कैप्शन के साथ डाली गई उस पोस्ट को आलोचना के बाद डिलीट कर दिया गया था, लेकिन उस वक्त भी उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए थे।

​बिहार भर में 50 पुलिसकर्मियों की लिस्ट तैयार

​यह कार्रवाई केवल पूर्णिया तक सीमित नहीं है। पुलिस मुख्यालय के सोशल मीडिया विंग ने पूरे प्रदेश में ऐसे 50 पुलिसकर्मियों की पहचान की है जो ड्यूटी के दौरान या वर्दी पहनकर रील बना रहे थे। इन 50 कर्मियों में 32 महिलाएं और 18 पुरुष शामिल हैं।

  • ​टॉप पर पटना: सबसे ज्यादा 16 पुलिसकर्मी राजधानी पटना से हैं।
  • ​अन्य जिले: नालंदा और मधुबनी से भी 4-4 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की तलवार लटकी है।
  • ​विभागीय जांच: निलंबन के साथ-साथ इन सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की जा रही है।

​क्या कहता है पुलिस मैनुअल?

​बिहार पुलिस मैनुअल और अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के अनुसार, पुलिस अधिकारियों को अपने पद की गरिमा और कार्यस्थल की शुचिता बनाए रखनी होती है। वर्दी पहनकर मनोरंजन के उद्देश्य से वीडियो बनाना या अपनी आधिकारिक कुर्सी पर किसी अनधिकृत व्यक्ति को बिठाना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। मुख्यालय ने स्पष्ट आदेश दिया है कि वर्दी की गरिमा सर्वोपरि है और इसे सोशल मीडिया की लोकप्रियता का जरिया नहीं बनाया जा सकता।