सोहराब आलम/पूर्वी चंपारण। सोशल मीडिया का मायाजाल आजकल किशोरों के लिए किस कदर खतरनाक साबित हो रहा है, इसकी एक बानगी पूर्वी चंपारण जिले में देखने को मिली। जिले के महुआवा थाना क्षेत्र के विंध्यवासिनी गांव से एक साथ तीन स्कूली छात्राओं के अचानक गायब होने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। हालांकि, मोतिहारी पुलिस की सूझबूझ और बिजली जैसी फुर्ती ने महज तीन घंटों के भीतर इस गुत्थी को सुलझा लिया।

​लापता होने की खबर और पुलिस का एक्शन

​घटना की गंभीरता को देखते हुए रक्सौल एसडीपीओ मनीष आनंद के नेतृत्व में पुलिस की अलग-अलग टीमें तुरंत सक्रिय हुईं। बताया गया कि तीनों छात्राएं नाबालिग हैं और एक ही स्कूल में पढ़ती हैं। जैसे ही परिजनों ने बच्चियों के लापता होने की सूचना महुआवा थाना को दी, पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय इनपुट के आधार पर जाल बिछाया। पुलिस की मुस्तैदी का ही नतीजा था कि अपहरण जैसी किसी बड़ी वारदात या अनहोनी होने से पहले ही बच्चियों को सुरक्षित लोकेट कर लिया गया।

​विभिन्न रेलवे स्टेशनों से हुई बरामदगी

​सघन तलाशी अभियान के दौरान पुलिस ने तीनों छात्राओं को अलग-अलग स्थानों से बरामद किया। रक्सौल एसडीपीओ मनीष आनंद ने प्रेस वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि एक लड़की को छौड़ादानो रेलवे स्टेशन से बरामद किया गया, जबकि अन्य दो लड़कियों को जयमूर्ति नगर रेलवे स्टेशन से पुलिस ने अपने संरक्षण में लिया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने परिजनों की जान में जान डाल दी।

​सोशल मीडिया के प्रलोभन में उठाया कदम

​पूछताछ के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ। एसडीपीओ ने बताया कि तीनों छात्राएं सोशल मीडिया के जरिए किसी बाहरी प्रलोभन के जाल में फंस गई थीं। इसी से प्रभावित होकर उन्होंने एक साथ घर से भागने की योजना बनाई थी। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि वे किसके संपर्क में थीं। इस घटना ने एक बार फिर बच्चों पर डिजिटल निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित किया है।