पटना। बिहार की राजनीति में आज का दिन बेहद निर्णायक है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज विधानसभा में अपनी सरकार का बहुमत साबित करेंगे। मुख्यमंत्री के विशेष आग्रह पर बुलाए गए इस एक दिवसीय सत्र के दौरान सदन की पूरी तस्वीर बदली हुई नजर आएगी। 14 अप्रैल को नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद 15 अप्रैल को सत्ता की कमान संभालने वाले सम्राट चौधरी कैबिनेट विस्तार से पहले अपनी संवैधानिक शक्ति का प्रदर्शन करना चाहते हैं।
संख्या बल में भारी एनडीए: 201 विधायकों का समर्थन
मौजूदा विधानसभा समीकरणों को देखें तो सम्राट सरकार के पास बहुमत का जादुई आंकड़ा पार करने के लिए पर्याप्त संख्या है। बांकीपुर सीट खाली होने के कारण सदन की वर्तमान प्रभावी संख्या 242 है। सरकार को कुल 201 विधायकों का ठोस समर्थन प्राप्त है, जिनमें भाजपा के 88, जदयू के 85, लोजपा (रामविलास) के 19, हम (HAM) के 5 और आरएलएम के 4 विधायक शामिल हैं। वहीं, विपक्ष के पास केवल 41 विधायकों का कुनबा बचा है।
सदन की कार्यवाही और नया एजेंडा
कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होगी, जिसकी शुरुआत विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के संबोधन से होगी। इसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहली बार सदन के नेता के रूप में अपनी सरकार का विजन और एजेंडा पेश करेंगे। विश्वास मत के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के नेताओं को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। विपक्षी खेमे से तेजस्वी यादव सरकार को घेरने की कमान संभालेंगे, हालांकि कांग्रेस में अब तक विधायक दल के नेता का नाम तय न होना विपक्ष की कमजोरी को दर्शाता है।
’खेला’ होने का डर: तेजस्वी ने रद्द किया बंगाल दौरा
भले ही आंकड़ों में सरकार मजबूत दिख रही हो, लेकिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को पाला बदलने का डर सता रहा है। राज्यसभा चुनाव के दौरान राजद और कांग्रेस के विधायकों द्वारा की गई ‘क्रॉस वोटिंग’ और अनुपस्थिति ने विपक्ष के भीतर अविश्वास पैदा कर दिया है। इसी आशंका के चलते तेजस्वी यादव ने अपना प्रस्तावित बंगाल दौरा रद्द कर दिया है और वे खुद अपने विधायकों की घेराबंदी कर रहे हैं ताकि फ्लोर टेस्ट के दौरान कोई और ‘खेला’ न हो सके।
बदली हुई नजर आएगी सदन की सिटिंग
सत्ता परिवर्तन के बाद आज सदन की बैठक व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी। जो नेता कल तक साथ थे, वे आज आमने-सामने होंगे। मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी का यह पहला शक्ति परीक्षण है, जो राज्य की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेगा। इस सत्र में विश्वास मत के अतिरिक्त अन्य किसी भी विधायी कार्य को एजेंडे में शामिल नहीं किया गया है।
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