पटना। शहर को देश के सबसे स्वच्छ शहरों की कतार में खड़ा करने के लिए पटना नगर निगम (PMC) ने कमर कस ली है। आगामी 25 अप्रैल से 31 मई तक चलने वाले ‘स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26’ के फील्ड असेसमेंट के लिए केंद्रीय टीम पटना पहुंच रही है। इस बार निगम का लक्ष्य ‘गार्बेज फ्री सिटी’ कैटेगरी में फाइव स्टार रैंकिंग हासिल करना है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष पटना को 21वां स्थान और थ्री-स्टार रेटिंग मिली थी।
अंकों का गणित: सिटिजन फीडबैक की भूमिका हुई दोगुनी
इस साल स्वच्छता की जंग कुल 12,500 अंकों के लिए होगी। सर्वेक्षण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें जनता की आवाज को पहले से अधिक तवज्जो दी गई है। सिटिजन फीडबैक के लिए निर्धारित अंकों को 500 से बढ़ाकर अब 1000 कर दिया गया है। केंद्रीय टीम नागरिकों से 12 विशिष्ट सवाल पूछेगी, जिनके जवाब शहर की वास्तविक स्वच्छता रैंकिंग तय करेंगे।
कुल अंकों को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:
- फील्ड असेसमेंट: 10,500 अंक
- ODF और वाटर प्लस: 1,000 अंक
- गार्बेज फ्री सिटी: 1,000 अंक
‘नगर शत्रु’ सावधान: गंदगी फैलाई तो लगेगा जुर्माना
निगम ने इस बार ‘रेड स्पॉट’ (जहां अक्सर गंदगी रहती है) और ‘येलो स्पॉट’ (जहां लोग पेशाब करते हैं) को खत्म करने के लिए सख्त रुख अपनाया है। खुले में शौच करने, कचरा फेंकने या पान-तंबाकू थूकने वालों को ‘नगर शत्रु’ की श्रेणी में रखा गया है और उन पर 500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है। शहर के प्रमुख स्थलों पर ICCC (इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर) के जरिए तीसरी आंख से निगरानी की जा रही है।
सौंदर्यीकरण और बुनियादी सुधारों पर जोर
सर्वेक्षण को देखते हुए पटना की दीवारों पर मनमोहक पेंटिंग, डिवाइडरों का रंग-रोहन और सार्वजनिक स्थलों का सौंदर्यीकरण युद्ध स्तर पर जारी है। अब तक 735 से अधिक कूड़ा पॉइंट्स (GVP) को समाप्त किया जा चुका है। केंद्रीय टीम न केवल सड़कों, बल्कि तंग गलियों, नालों, झुग्गी-बस्तियों, धार्मिक स्थलों और अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाइयों (STP/FSTP) का भी बारीकी से निरीक्षण करेगी। टीम के औचक निरीक्षण की संभावना को देखते हुए स्कूलों और सार्वजनिक सुविधाओं को सप्ताह के सातों दिन खुला रखने का निर्देश दिया गया है।
चुनौतियां और जागरूकता की कमी
तैयारियों के बीच कुछ धरातलीय चुनौतियां अब भी बरकरार हैं। 1 अप्रैल से लागू ‘फोर-बिन’ (चार डस्टबीन) कचरा संग्रह नियम का पालन पूरी तरह नहीं हो पा रहा है। लोग अब भी सूखा, गीला और खतरनाक कचरा अलग-अलग नहीं कर रहे हैं। साथ ही, रामाचक बैरिया स्थित कचरा प्रोसेसिंग प्लांट का पूर्ण संचालन न होना रैंकिंग के लिए एक बाधा बन सकता है। निगम ने चेतावनी दी है कि यदि डेस्क असेसमेंट के दौरान दी गई जानकारी फील्ड में गलत पाई गई, तो अंकों में भारी कटौती की जाएगी।
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