Dharm Desk – सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के साथ ही नौ दिनों में तापमान तेजी से बढ़ता है,वातावरण में तीव्र गर्मी महसूस होती है. यह समय केवल मौसम परिवर्तन ही नहीं, बल्कि अनुशासन, संयम और सेवा के भाव को मजबूत करने का भी माना जाता है. गर्मी के सबसे तीखे दौर का प्रतीक नौतपा इस बात 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहेगा.

नौतपा के दौरान सुबह जल्दी उठकर सूर्य को अर्घ्य देने और दिनचर्या में सादगी अपनाने की परंपरा देखी जाती है. वहीं समाज में जरूरतमंदों की सहायता के लिए कई तरह के दान और सेवा कार्य भी किए जाते हैं. जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिल सके.
नौतपा में दिनवार दान का विशेष महत्व
पहला दिन : ठंडा जल और शरबत का वितरण, राहगीरों के लिए प्याऊ की व्यवस्था कर दे.
दूसरा दिन: गेहूं और चावल जैसे अन्न का दान, जरूरतमंद परिवारों की सहायता के रूप में करें.
तीसरा दिन: छाछ, लस्सी और ठंडे पेय पदार्थों का वितरण, सार्वजनिक जगह या मंदिर में करें.
चौथा दिन: पंखे और हाथ से चलने वाले पंखों का दान, गर्मी से राहत के लिए किसी संस्था या सामाजिक संगठन को दे सकते है.
पांचवां दिन: सूती वस्त्रों का वितरण जरूरतमंद लोगों को करें ताकि शरीर को ठंडक मिल सके.
छठा दिन: छाते और चप्पलों का दान ब्राह्मण या लारी लगाकर बैठने वाले जरूरतमंद को कर दें जिससे धूप से बचाव मिले.
सातवां दिन: तौलिया और गमछा का वितरण ऐसी जगह कर सकते हैं यहां मजदूर वर्ग काम करता है, दैनिक उपयोग की सुविधा के लिए यह उपयोगी होगा.
आठवां दिन: फल और हल्के खाद्य पदार्थों का दान हॉस्पिटल या मरीजों को दें. स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बहुत बेहतर होगा.
नौवां दिन : जल से भरे घड़े या मटका दान, लंबे समय तक राहत देने के लिए किसी भी बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन पर रखवा दे.

