पटना। बिहार की आर्थिक सेहत और बढ़ते कर्ज के बोझ को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा राज्य की वित्तीय स्थिति पर उठाए गए सवालों के बाद, भाजपा ने आंकड़ों का एक चार्ट जारी कर जोरदार पलटवार किया है। भाजपा का दावा है कि बिहार की आर्थिक स्थिति अन्य कई विकसित राज्यों की तुलना में कहीं बेहतर है।

​भाजपा का पलटवार

​पटना स्थित पार्टी कार्यालय में भाजपा प्रवक्ताओं ने एक प्रेस वार्ता के दौरान तेजस्वी यादव के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार ने तंज कसते हुए कहा कि तेजस्वी यादव गला फाड़-फाड़कर जनता को भ्रमित कर रहे हैं कि बिहार 4.10 लाख करोड़ के कर्ज में डूबा है। भाजपा ने तर्क दिया कि किसी भी राज्य की कर्ज स्थिति को केवल संख्या से नहीं, बल्कि उसकी GSDP (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) के अनुपात में देखा जाना चाहिए।

​चार्ट के जरिए अन्य राज्यों से तुलना

​भाजपा द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए चार्ट के अनुसार, बिहार का कर्ज उसकी GSDP का मात्र 35% है, जो एक स्थिर अर्थव्यवस्था का संकेत है। भाजपा ने तुलनात्मक आंकड़े पेश करते हुए बताया कि कई ऐसे राज्य जिनकी आबादी बिहार से कम है, उन पर कर्ज का बोझ कहीं अधिक है:

  • ​तमिलनाडु: ₹9 लाख करोड़
  • ​उत्तर प्रदेश: ₹8.60 लाख करोड़
  • ​महाराष्ट्र: ₹8.10 लाख करोड़
  • ​कर्नाटक: ₹7.30 लाख करोड़
  • ​पंजाब: ₹4.27 लाख करोड़
  • ​बिहार: ₹4.10 लाख करोड़

​तेजस्वी के आरोप: खजाना खाली, विकास ठप

​इससे पहले सदन में तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार को घेरते हुए कहा था कि राज्य का खजाना खाली हो चुका है। उन्होंने चिंता जताई कि जब सरकार के पास संसाधन ही नहीं होंगे, तो पेंशन और विकास कार्य जैसे बुनियादी खर्चे कैसे पूरे होंगे। तेजस्वी ने राजनीतिक अस्थिरता का मुद्दा भी उठाया और कहा कि पिछले 5 साल में 5 बार सरकारें बदलीं, जिससे राज्य का विकास प्रभावित हुआ है।

​नेतृत्व और गठबंधन पर सवाल

​तेजस्वी ने भाजपा-जदयू के चुनावी नारे ‘2025 से 30 फिर से नीतीश’ पर चुटकी लेते हुए कहा कि गठबंधन खुद अपने नेतृत्व को लेकर स्पष्ट नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास राज्य को आर्थिक संकट से उबारने के लिए कोई स्पष्ट कार्ययोजना नहीं है।