अजय सैनी, भिवानी। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की सीनियर सेकेंडरी परीक्षाओं की मार्किंग के दौरान उत्तर पुस्तिकाओं में छात्रों की अजीबोगरीब अपीलें सामने आ रही हैं। भिवानी के मार्किंग सेंटर पर तैनात अध्यापक उस वक्त हैरान रह गए जब एक छात्रा ने पेपर में लिखा कि मुझे पास कर देना, वरना मेरा रिश्ता टूट जाएगा। केवल यही नहीं, कई छात्रों ने अपनी पारिवारिक और व्यक्तिगत समस्याओं का हवाला देते हुए पास करने की भावुक अपील की है। बोर्ड ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि भावना के आधार पर किसी को अंक नहीं दिए जाएंगे।

भावुक अपील और पारिवारिक मजबूरियों का हवाला
मार्किंग सेंटर पर उत्तर पुस्तिकाएं जांच रहे प्राध्यापकों को कई ऐसे पत्र मिले हैं जो छात्रों ने सीधे उनके नाम लिखे हैं। एक छात्र ने लिखा कि उसकी मां की तबीयत खराब होने के कारण वह पढ़ाई नहीं कर सका, इसलिए उसे पास कर दिया जाए। वहीं एक अन्य छात्र ने अपने पिता की बीमारी का जिक्र करते हुए पास करने की विनती की। सबसे ज्यादा चर्चा उस छात्रा की हो रही है जिसने अपनी शादी और रिश्ता टूटने का डर दिखाकर पास होने की गुहार लगाई है। छात्र उत्तर पुस्तिकाओं में भावनात्मक संदेश लिखकर अपनी शैक्षणिक कमजोरी को छिपाने का प्रयास कर रहे हैं।
पहचान बताने वाले छात्रों पर बोर्ड की सख्त कार्रवाई
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. पवन कुमार ने बताया कि इस तरह की अपील करने वाले छात्र मनोवैज्ञानिक रूप से दबाव में होते हैं। उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी छात्र को इन पत्रों के आधार पर पास नहीं किया जाएगा। बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि जिन छात्रों ने उत्तर पुस्तिका में अपनी पहचान, मोबाइल नंबर या स्कूल का नाम उजागर किया है, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए केस दर्ज किए जा रहे हैं। बिना पहचान बताए अपील करने वालों पर फिलहाल कोई केस नहीं किया गया है, लेकिन उनके अंकों में कोई रियायत नहीं दी जाएगी।
मार्किंग प्रक्रिया में सख्ती और अनुशासन
वर्तमान में बोर्ड की सीनियर सेकेंडरी परीक्षाओं का मूल्यांकन कार्य तेजी से चल रहा है। बोर्ड चेयरमैन ने शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे केवल उत्तरों की गुणवत्ता के आधार पर ही अंक दें। उत्तर पुस्तिका की फोटो लेना या उसे सार्वजनिक करना कानूनी अपराध है, इसलिए बोर्ड इन पत्रों को साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित रख रहा है। प्रशासन ने छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी है कि वे शॉर्टकट या भावनात्मक दबाव बनाने के बजाय केवल मेहनत और सही तैयारी पर भरोसा करें।
