संस्था 'हमारा परिवार' द्वारा आयोजित कार्यक्रम में समाजसेवियों और शिक्षाविदों ने मानवीय मूल्यों के संरक्षण पर बल दिया। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली हस्तियों को सम्मानित भी किया गया।
धनेश, रेवाड़ी। जिले में ‘हमारा परिवार’ संस्था द्वारा संस्कार निर्माण की दिशा में एक विशेष कार्यक्रम “लोगों की इस भीड़ में इंसान जाने कहां खो गया है” का गरिमामय आयोजन किया गया। रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जैन पब्लिक स्कूल के प्रधान मोहित जैन, वरिष्ठ शिक्षाविद प्रो. सीएल सोनी, आशियाना वृद्धाश्रम के प्रधान दिनेश राजपाल और संस्था के संयोजक दिनेश कपूर ने शिरकत की। वक्ताओं ने मानवीय संवेदनाओं के क्षरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिस प्रकार एक किसान को पता होता है कि उसके द्वारा बोया गया बीज फसल के रूप में कई गुना होकर वापस मिलेगा, ठीक उसी प्रकार हमारे अच्छे कर्म भी नि:स्वार्थ भाव से किए जाने पर कई गुना होकर हमारे जीवन में लौटते हैं।
बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष संदेश
कार्यक्रम के दौरान संस्था प्रधान अरुण गुप्ता, डॉ. बलबीर अग्रवाल और समाजसेवी आदर्श राजपाल ने सनातन धर्म के मूल भाव ‘जीव मात्र में परमात्मा का निवास’ पर प्रकाश डाला। महिला संयोजक शशि जुनेजा, मधु गुप्ता और डॉ. नीरू वर्मा ने माताओं से अपील की कि वे शाम की प्रार्थना के समय बच्चों को साथ बिठाएं और उन्हें सत्संग व भजनों से जोड़ें, जिससे परिवार का वातावरण खुशहाल बने और बच्चों में उच्च नैतिक संस्कारों का विकास हो। इसी कड़ी में हेल्थ कोच कंचन अदलखा ने चिलचिलाती गर्मी में स्वस्थ रहने के लिए उपयोगी हेल्थ टिप्स साझा किए और उपस्थित लोगों को प्राणायाम का अभ्यास भी कराया।
समाजसेवियों का बढ़ाया उत्साह
संस्था ने समाज के प्रति अपनी उल्लेखनीय सेवाएं देने वाले विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया। सम्मानित होने वालों में समाजसेवी धीरज जांगड़ा, अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के कृष्ण कुमार, राजेन्द्र गेरा, दयानन्द आर्य, रंगमंच सेवी विजय शर्मा, हेमंत ग्रोवर और कुलदीप सोनी शामिल रहे। कार्यक्रम की सफलता में डॉ. देवेन्द्र कुमार, प्रमोद सैनी, रोहित गेरा, कपिल कपूर और सोनिया कपूर सहित अन्य साथियों का विशेष सहयोग रहा। वक्ताओं ने अंत में यह निष्कर्ष निकाला कि समाज में इंसानियत को जीवित रखने के लिए इस तरह के वैचारिक और संस्कारात्मक कार्यक्रमों की आज नितांत आवश्यकता है।

