करनाल फर्टिलाइजर एसोसिएशन ने खाद कंपनियों द्वारा जबरन टैगिंग और सैंपलिंग नियमों के विरोध में आज जिले भर में सांकेतिक हड़ताल रखी। व्यापारियों ने मांगें न माने जाने पर अनिश्चितकालीन बंद की चेतावनी दी है।

लक्ष्य वर्मा, करनाल। जिला करनाल फर्टिलाइजर, पैस्टीसाइज एवं सीड ट्रेडर्ज एसोसिएशन के आह्वान पर आज जिले भर के खाद, बीज और कीटनाशक विक्रेताओं ने अपनी मांगों को लेकर पूर्णतः सांकेतिक हड़ताल रखी। एसोसिएशन के प्रधान रामकुमार गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि खाद कंपनियों और थोक विक्रेताओं की मनमानी के खिलाफ अब चुप नहीं बैठा जाएगा। व्यापारियों का आरोप है कि यूरिया और डीएपी जैसी अनिवार्य खादों की सप्लाई के साथ कंपनियां जबरन अवांछनीय कृषि उत्पाद (टैगिंग) दुकानदारों पर थोप रही हैं। इसी के विरोध में आज 27 अप्रैल को करनाल जिले के सभी छोटे-बड़े बिक्री केंद्रों पर ताले लटके रहे।

टैगिंग और सैंपलिंग नियमों पर रोष: यूपी की तर्ज पर रोक की मांग

एसोसिएशन के प्रधान रामकुमार गुप्ता ने व्यापारियों की समस्याओं को विस्तार से रखते हुए कहा कि खाद के साथ अन्य उत्पादों की टैगिंग और सीलबंद दवाइयों के सैंपल फेल होने पर दुकानदार को ‘प्रथम पक्ष’ बनाना सरासर गलत है। उन्होंने मांग की कि उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर हरियाणा में भी अनुदानित उर्वरकों के साथ गैर-अनुदानित उत्पादों को जबरन बेचने की बाध्यता पर तुरंत रोक लगाई जाए। इसके अलावा, बढ़ती लागत को देखते हुए उर्वरकों पर डीलर मार्जिन को बढ़ाकर कम से कम 8 प्रतिशत करने और ग्रामीण खुदरा विक्रेताओं के लिए ऑनलाइन पोर्टल की अनिवार्यता को वैकल्पिक बनाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है।

अनिश्चितकालीन बंद की चेतावनी: पीएम और कृषि मंत्री को भेजा जाएगा ज्ञापन

करनाल एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार और उच्च अधिकारियों ने इस सांकेतिक हड़ताल के बाद भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो जिले के तमाम दुकानदार अनिश्चितकाल के लिए अपनी दुकानें बंद कर सकते हैं। अपनी मांगों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने के लिए एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री को एक मांग पत्र भेजने का निर्णय लिया है। व्यापारियों का कहना है कि पोर्टल की जटिलताओं और कंपनियों के अनुचित दबाव के कारण वे आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं। आज की इस हड़ताल के कारण करनाल जिले के किसानों को खाद और बीज की उपलब्धता में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।