कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सियासत तेज हो गई है और कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सिर्फ एक साल के भीतर ही 3,92,983 छात्रों की संख्या कम हो गई है, जो करीब 18% की गिरावट को दर्शाता है।
शैलजा ने इसे एक चिंताजनक संकेत बताते हुए कहा कि यह कोई एक साल की समस्या नहीं है, बल्कि पिछले छह वर्षों से लगातार नामांकन घट रहा है, जिससे साफ है कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था से लोगों का भरोसा कमजोर हो रहा है।
अपने बयान में उन्होंने सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत पर भी सवाल उठाए। शैलजा के मुताबिक, आज भी कई स्कूल बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। पर्याप्त कमरे नहीं हैं, साफ पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई है, वहीं आधुनिक संसाधनों का भी अभाव है। उन्होंने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं, जिसका सीधा असर पढ़ाई की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
कांग्रेस सांसद ने सरकार के “प्रवेश उत्सव” जैसे अभियानों पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि ये कार्यक्रम केवल कागज़ों तक सीमित रह गए हैं और जमीनी स्तर पर इनका असर दिखाई नहीं देता। उन्होंने सीधे तौर पर सरकार से जवाब मांगते हुए कहा कि हर साल दाखिलों में हो रही गिरावट को रोकने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे।

इस बयान के बाद हरियाणा की राजनीति में शिक्षा का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो सकते हैं, क्योंकि शिक्षा जैसा संवेदनशील विषय सीधे तौर पर आम जनता और प्रदेश के भविष्य से जुड़ा हुआ है।
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