यूपी में विधानसभा चुनाव में अब कुछ महीने बचे गईं, जहाँ तमाम दल अपनी रणनीति बनाने में लगे हैं वहीं समाजवादी पार्टी के ‘यादव परिवार’ के भीतर रार की खबरें अखिलेश यादव की परेशानी बढ़ा रही हैं. दरअसल खबर है कि पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और उनके चाचा और सपा के संस्थापक सदस्य शिवपाल यादव के बीच तकरार बढ़ गई है. इस तकरार के पीछे की वजह अपर्णा यादव बताई जा रही हैं.

चाचा-भतीजे में हुई तीखी नोंकझोंक?

दरअसल, नारी शक्ति बंधन अधिनियम से जुड़े संशोधन बिल के लोकसभा में पास न होने पर भाजपा ने विपक्षी दलों के खिलाफ आंदोलन किया. भाजपा के कई दिग्गज नेता सड़कों पर उतरे और विपक्ष के चरित्र और उनकी सोच लेकर आम जनता के सामने रखा. भाजपा की नेता और यूपी महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने भी प्रदर्शन किया, इस दौरान सपा और कांग्रेस के झंडे जलाए गए. जिसके बाद सपाई आक्रोशित हो गए. इसके बाद अखिलेश यादव में एक प्रेस कांफ्रेंस की. इस प्रेस कांफ्रेंस को लेकर कहा जा रहा है कि शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई.

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अपर्णा और उनके परिवार के प्रति शिवपाल का सॉफ्ट कॉर्नर

दरअसल, अपर्णा और उनके परिवार के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर रखने वाले शिवपाल यादव चाहते थे कि अपर्णा को लेकर सपा या उनके किसी स्तर के नेताओं तरफ से कोई भी बयानबाजी ना हो, ना ही कोई विरोध किया जाए. इसको लेकर शिवपाल यादव अखिलेश यादव को समझाने की कोशिशें करते रहे कि अपर्णा परिवार का हिस्सा हैं, उनका सार्वजनिक तौर पर राजनीतिक विरोध ठीक नहीं होगा, इससे मुलायम सिंह यादव के राजनीतिक विरासत को लेकर गलत संदेश जाएगा, लोग परिवार का मजाक उड़ायेंगे…लेकिन कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव ने शिवपाल को झिड़क दिया.

मैं तो सपा का मामूली सिपाही-शिवपाल

वहीं शिवपाल यादव ने भी अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि ‘विनाश काले विपरीत बुद्धि।’ सपा में लगातार दरकिनार किए जा रहे शिवपाल की पार्टी में हैसियत को लेकर जब सवाल किया गया तो उन्होंने खुद को सपा का मामूली सिपाही बताया. उनके इस तरह के बेबसी वाले जवाब पर कहा जाने लगा कि आखिर जिस पार्टी को खड़ा करने में शिवपाल यादव ने अपना खून पसीना बहाया उसी पार्टी में उनकी नहीं सुनी जा रही. उन्हें एक सामान्य कार्यकर्ता की तरह भी इज्जत बढ़ी मुश्किल से मिल पा रही है.

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चाचा-भतीजे में रार, हो ना जाए सपा का नुक़सान

फिलहाल शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच पहले भी नाराजगी चर्चा में रही है लेकिन अखिलेश यादव इसे कई मौकों पर कवर करते देखे गए हैं लेकिन चुनावी मोड में उतरने से पहले दोनों के बीच की नाराजगी से सपा को नुकसान होना तय है.