नई दिल्ली: दिल्ली नगर निगम (MCD) की हेरिटेज सेल नजफगढ़ स्थित ऐतिहासिक दिल्ली गेट, नजफगढ़ के पुनरुद्धार की तैयारी कर रही है। इसके लिए जल्द ही एक कंसल्टेंट नियुक्त किया जाएगा, जो संरचना की स्थिति का आकलन कर काम का दायरा तय करेगा और लागत का अनुमान लगाएगा। यह कदम स्थानीय पार्षद अमित खरखारी की अपील के बाद उठाया गया है। उन्होंने इस नोटिफाइड हेरिटेज इमारत की जर्जर हालत को लेकर चिंता जताई थी और इसके संरक्षण के लिए तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। MCD अधिकारियों के अनुसार, कंसल्टेंट की रिपोर्ट के आधार पर आगे की बहाली (restoration) योजना तैयार की जाएगी, जिसमें संरचना की मरम्मत और ऐतिहासिक स्वरूप को संरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
नजफगढ़ के ‘दिल्ली गेट’ का इतिहास जानिए
यह गेट देश की राजधानी में मौजूद तीन “दिल्ली गेट” नामक संरचनाओं में से एक है। अन्य दो गेट मध्य दिल्ली में अंसारी रोड के पास और लाल किला परिसर के भीतर स्थित हैं। इतिहास के अनुसार, इस गेट का निर्माण 1770 में मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय के कमांडर-इन-चीफ मिर्जा नजफ खान द्वारा कराया गया था। यह संरचना उस दौर में नजफगढ़ क्षेत्र के एक प्रमुख कस्बे का हिस्सा हुआ करती थी। समय के साथ यह ऐतिहासिक इमारत जर्जर स्थिति में पहुंच गई, जिसके संरक्षण के लिए अब MCD ने कंसल्टेंट नियुक्त करने और मरम्मत कार्य की योजना बनाने की प्रक्रिया शुरू की है।
MCD ने तेज की हेरिटेज इमारत को सजाने की तैयारी
अधिकारी के अनुसार, इस गेट का नाम “दिल्ली गेट” इसलिए पड़ा क्योंकि यह दिल्ली की दिशा की ओर स्थित था। उन्होंने बताया कि यह संरचना कभी एक ऐसी बस्ती का हिस्सा थी, जहां आने-जाने के कई रास्ते थे और यह क्षेत्र उस समय एक सक्रिय कस्बे के रूप में विकसित था। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल यह इमारत पूरी तरह से ध्वस्त नहीं हुई है, लेकिन इसका अंदरूनी हिस्सा धीरे-धीरे खराब होने लगा है। इसी वजह से इसके संरक्षण और मरम्मत की आवश्यकता महसूस की गई है।
नगर निगम के अनुसार, इस हेरिटेज संरचना को संवारने के साथ-साथ इसके आसपास हरियाली बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा सकता है, ताकि पूरे क्षेत्र को एक बेहतर और आकर्षक स्वरूप दिया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि इस गेट के आसपास रहने वाले बुजुर्ग इसके इतिहास और महत्व से परिचित हैं, लेकिन आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे संरक्षित करना और उसकी ऐतिहासिक पहचान से परिचित कराना बेहद जरूरी है।
क्यों चर्चा में नजफगढ़ का ‘दिल्ली गेट’
दिल्ली नगर निगम द्वारा नजफगढ़ स्थित दिल्ली गेट, नजफगढ़ के संरक्षण और पुनरुद्धार की योजना के बीच इसके आसपास मौजूद ऐतिहासिक अवशेषों को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारियाँ सामने आई हैं। हाल ही में इस जगह का दौरा करते समय निगम अधिकारियों ने पुलिस थाने के पास एक पुराना कुआं और एक मस्जिद देखी है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन संरचनाओं में से कौन-सी इमारत कभी मिर्जा नजफ खान के किले या उनके निवास का हिस्सा रही होगी।
प्रारंभिक आकलन के लिए हाल ही में एक पुरातत्वविद् ने भी इस क्षेत्र का निरीक्षण किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थल का ऐतिहासिक महत्व काफी व्यापक है और इसके विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग कालखंडों की परतें जुड़ी हुई हो सकती हैं। इसके अलावा, इस क्षेत्र में एक सफेद संगमरमर की पट्टिका भी मौजूद है, जिस पर उन स्थानीय लोगों के नाम अंकित हैं जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध में भाग लिया था, जिनमें शहीद हुए सैनिकों के नाम भी शामिल हैं। यह पट्टिका इस स्थल को केवल एक ऐतिहासिक इमारत ही नहीं, बल्कि एक स्मारकीय और सांस्कृतिक महत्व का स्थान भी बनाती है।
MCD अधिकारी ने पूरे मामले में क्या कहा
अधिकारियों ने बताया कि उस समय ऐसे क्षेत्रों को “जिला” कहा जाता था और ब्रिटिश काल में इन स्थानों पर प्रथम विश्व युद्ध में भाग लेने वाले स्थानीय लोगों का रिकॉर्ड भी दर्ज किया जाता था। उदाहरण के तौर पर महरौली क्षेत्र में एक पुराने दवाखाने की बाहरी दीवार पर भी इसी तरह के ऐतिहासिक लेख और अभिलेख देखने को मिलते हैं। वहीं बादली में एक पुरानी इमारत में एक पट्टिका (plaque) मिली है, जहां करीब 150 साल पहले एक कचहरी (अदालत) हुआ करती थी।
आजादी की पहली लड़ाई से कनेक्शन जानिए
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में स्थित दिल्ली गेट, नजफगढ़ आज एक व्यस्त बाजार के बीच मौजूद होकर भी अपने समृद्ध और बहु-स्तरीय इतिहास की बहुत कम झलक दिखाता है। ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र 1857 का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। रिकॉर्ड्स के अनुसार, 25 अगस्त 1857 को यहां नजफगढ़ की लड़ाई लड़ी गई थी, जो उस समय की निर्णायक घटनाओं में से एक थी। इस संघर्ष के दौरान ब्रिगेडियर जॉन निकोलसन के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना ने भारतीय सिपाहियों की एक बड़ी टुकड़ी को पराजित किया था। यह टुकड़ी दिल्ली की घेराबंदी को तोड़ने और रणनीतिक बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रही थी।
पार्षद अमित खरखारी ने लेटर में की एमसीडी से अपील
दिल्ली नगर निगम द्वारा नजफगढ़ स्थित दिल्ली गेट, नजफगढ़ के संरक्षण की प्रक्रिया तेज किए जाने के बीच इसके मरम्मत कार्य को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर पहल शुरू हो गई है। 23 अप्रैल को लिखे एक पत्र में पार्षद अमित खरखारी ने बताया कि वर्ष 2023-24 में MCD के निरीक्षण के दौरान इस ऐतिहासिक इमारत में स्पष्ट रूप से ढांचागत नुकसान और गंभीर टूट-फूट देखी गई थी।
उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि और अधिक क्षति को रोकने के लिए समयबद्ध तरीके से मरम्मत कार्य शुरू किया जाए, ताकि इस विरासत स्मारक को पूरी तरह नष्ट होने से बचाया जा सके। खरखारी ने जोर देकर कहा कि यह केवल एक पुरानी संरचना नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा है, जिसे संरक्षित करना बेहद जरूरी है।
2007 में आखिरी मरम्मत, अब स्ट्रक्चर के हालात खराब
खरखारी ने बताया कि इस ऐतिहासिक संरचना की आखिरी बड़ी मरम्मत वर्ष 2007 में की गई थी, लेकिन उस दौरान इसके बाहरी हिस्से पर टाइलें लगा दी गई थीं, जिससे इसकी मूल ऐतिहासिक बनावट प्रभावित हुई। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब जो भी मरम्मत कार्य किया जाए, वह पूरी तरह मूल सामग्री (original materials) के उपयोग के साथ ही होना चाहिए, ताकि इसकी ऐतिहासिक प्रामाणिकता बनी रहे। खरखारी के अनुसार, भले ही यह गेट बाहर से अपेक्षाकृत ठीक दिखाई देता है, लेकिन इसके अंदरूनी ढांचे की हालत काफी खराब हो चुकी है और तत्काल संरक्षण की आवश्यकता है।
इस गेट के 8 कमरे बंद पड़े
स्थानीय विवरणों के अनुसार, गेट के अंदर बने आठ कमरे लंबे समय से बंद पड़े हैं और अब जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं। यह स्थिति इस ऐतिहासिक संरचना के संरक्षण को और भी जरूरी बनाती है। स्थानीय स्तर पर यह भी चिंता जताई जा रही है कि जहां नजफगढ़ के अन्य ऐतिहासिक गेट समय के साथ अपनी पहचान खो चुके हैं, वहीं इस धरोहर को भी खंडहर में बदलने से बचाना आवश्यक है। जानकारी के अनुसार, एक समय इस गेट का नाम बदलकर “वैद्य किशन लाल द्वार” रखा गया था, हालांकि इसका मूल नाम “दिल्ली गेट” आज भी स्थानीय लोगों की यादों और ऐतिहासिक पहचान में जीवित है।
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