लक्ष्मीकांत बंसोड़, बालोद. भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां लोग अपने लिए मुश्किल से समय निकाल पाते हैं, वहीं बालोद जिले के भोज साहू नौकरी के बाद पूरा समय पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए समर्पित कर रहे हैं. वृक्षारोपण, जल संरक्षण और नीम कॉरिडोर जैसी अनूठी पहलों के माध्यम से उन्होंने न सिर्फ प्रकृति संरक्षण की मिसाल पेश की है, बल्कि समाज में एक अलग पहचान भी बनाई है. पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता और कार्यशैली, उन्हें क्षेत्र के लिए एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बनाते हैं.

इन दिनों भोज साहू पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देने के लिए एक अनोखी पहल चला रहे हैं. लोगों को अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से वे डाक के माध्यम से विभिन्न उपयोगी वृक्षों के बीज भेज रहे हैं, ताकि लोग अपनी खाली जमीनों और आसपास के क्षेत्रों में पौधारोपण कर हरियाली बढ़ाने में योगदान दे सकें.

भोज साहू अब तक मुख्यमंत्री, वन मंत्री, विधायक, राज्यपाल समेत सैकड़ों लोगों को डाक के जरिए बीज भेज चुके हैं. इसके साथ ही वे सोशल मीडिया का भी प्रभावी उपयोग कर रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ सकें. सोशल मीडिया के माध्यम से जो भी लोग उनसे बीज की मांग कर रहे हैं, भोज साहू उनके पते पर बीज भेजने का काम कर रहे हैं.

18 वर्षों से पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए सक्रिय

ये हैं छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के अंतिम छोर पर बसे ग्राम देवरी (द) के निवासी भोज साहू. पेशे से रेडियोग्राफर भोज साहू डोंगरगांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अपनी सेवाएं देते हैं, लेकिन उनकी पहचान केवल एक स्वास्थ्यकर्मी तक सीमित नहीं है. पिछले 18 वर्षों से वे पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रहे हैं.

नौकरी के बाद मिलने वाले समय को उन्होंने समाज और प्रकृति के नाम समर्पित कर दिया है. हजारों पौधों का रोपण, उनकी देखरेख और लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है.   

जल प्रहरी सम्मान से हो चुके हैं सम्मानित

भोज साहू ने जनसहयोग से डोंगरगांव क्षेत्र में लगभग 30 कुओं की सफाई और सौंदर्यीकरण का कार्य कराया है. जल स्रोतों को बचाने की इस मुहिम ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया. इस प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया. जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें नई दिल्ली में “जल प्रहरी सम्मान” से सम्मानित किया जा चुका है.

पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने के उद्देश्य से भोज साहू ने हाल ही में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और कई मंत्रियों को डाक के माध्यम से विभिन्न प्रजातियों के बीज नि:शुल्क भेजे हैं. उनके इस अभियान की चर्चा सोशल मीडिया पर भी हो रही है, जहां लोग स्वयं भी उनसे बीज मांगकर पौधारोपण की इच्छा जता रहे हैं.        

6 किमी की सड़क को बनाया ‘नीम कॉरिडोर’

प्रकृति को बचाने की यह मुहिम केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है. भोज साहू ने अपने गांव देवरी (द) से खुरसुनी तक लगभग छह किलोमीटर लंबी सड़क के दोनों किनारों पर नीम के पौधे लगाकर जनसहयोग से एक अनूठा “नीम कॉरिडोर” तैयार किया है. यह पहल आज क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन चुकी है.

भोज साहू की इस हरित मुहिम में उनका 8 वर्षीय बेटा भी पूरे उत्साह के साथ सहभागी बन रहा है. बीज एकत्रित करने से लेकर पौधारोपण की तैयारियों तक वह हर कदम पर अपने पिता का हाथ बंटाता है. इतना ही नहीं, वह अपनी मासूम और तुतलाती आवाज़ में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए वीडियो भी बनाता है, जिन्हें सोशल मीडिया पर साझा किया जाता है. उसके ये वीडियो लोगों को न केवल आकर्षित कर रहे हैं, बल्कि पेड़ लगाने और पर्यावरण बचाने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं. पिता-पुत्र की यह अनूठी जोड़ी हरियाली का संदेश घर-घर पहुंचाने में जुटी हुई है.

जब पर्यावरण संकट और जल संरक्षण की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं, ऐसे समय में भोज साहू जैसे प्रेरणदायी व्यक्ति समाज को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं. उनका संदेश साफ है— अगर हर व्यक्ति प्रकृति के लिए थोड़ा-सा काम करे तो पर्यावरण आपने आप सुरक्षित होता चले जाएगा.

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