हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर नगर निगम में वेतन भुगतान व्यवस्था में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। मास्टरकर्मियों की मेहनत की कमाई उनके बैंक खातों तक पहुंचने से पहले ही कथित तौर पर दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी गई। शुरुआती जांच में करीब 3 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया। जिसके बाद एमजी रोड थाना पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

5 कर्मचारियों के खातों से कथित हेराफेरी

जानकारी के अनुसार, नगर निगम के पांच मास्टरकर्मियों के वेतन भुगतान के दौरान उनके मूल बैंक खातों की जानकारी बदलकर राशि दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई। इस गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया।

उपायुक्त की शिकायत पर मामला दर्ज

नगर निगम के उपायुक्त डॉ. केशव सिंह की शिकायत पर एमजी रोड पुलिस ने अमन सालवी और आईटी विभाग में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी अनुज पंवार के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बैंक खातों में बदलाव किस स्तर पर और किसकी मिलीभगत से किया गया।

जांच में खुली गड़बड़ी की परतें

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि वेतन जारी करने की प्रक्रिया के दौरान पांच कर्मचारियों के बैंक खाते बदल दिए गए थे। इसके चलते उनकी तनख्वाह कथित तौर पर अनधिकृत खातों में पहुंच गई। मामला सामने आने के बाद निगम प्रशासन ने पूरे भुगतान सिस्टम की जांच शुरू कर दी है।

आउटसोर्स कर्मचारी पर गिरी पहली गाज

मामले में नाम सामने आने के बाद नगर निगम ने आईटी विभाग में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी अनुज पंवार की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। वहीं पुलिस अब डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। यह मामला केवल तीन लाख रुपये के कथित गबन तक सीमित नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम की वेतन भुगतान प्रणाली में कर्मचारियों के बैंक खाते आखिर बदले कैसे गए? क्या यह किसी एक व्यक्ति की करतूत थी या इसके पीछे बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था? और क्या इस तरह की गड़बड़ी पहले भी हुई है? फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस कथित गबन में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा वास्तविक नुकसान कितना हुआ।

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