Tall Poppy Syndrome: हमारे आसपास ऐसे बहुत से लोग होते हैं, जो किसी की सफलता पर तालियां बजाने के बजाय उसकी उपलब्धि को छोटा करने लगते हैं। कोई बच्चा पढ़ाई में अच्छा करता है तो कहा जाता है- “अरे, इसमें कौन-सी बड़ी बात है!” कोई महिला अपने करियर में आगे बढ़ती है तो फुसफुसाहट शुरू हो जाती है- “अब तो बहुत बदल गई है।” कोई व्यक्ति अपने क्षेत्र में पहचान बनाता है तो उसकी मेहनत से अधिक उसके भाग्य की चर्चा होने लगती है।
कभी-कभी ये बातें सामान्य लगती हैं, लेकिन जब किसी व्यक्ति की सफलता, प्रतिभा या उपलब्धि को बार-बार इसलिए कमतर किया जाए क्योंकि वह दूसरों से आगे निकल रहा है, तो इसके पीछे एक मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति काम कर सकती है, जिसे Tall Poppy Syndrome कहा जाता है।
‘Tall Poppy’ आखिर है क्या?
‘Tall Poppy’ का रूपक उस पौधे से लिया गया है जो खेत में बाकी पौधों से अधिक ऊँचा दिखाई देता है। उसे इसलिए काट दिया जाता है ताकि सभी पौधे एक समान दिखाई दें।

मनोविज्ञान और सामाजिक व्यवहार के संदर्भ में Tall Poppy Syndrome उस प्रवृत्ति को दर्शाता है जिसमें किसी व्यक्ति को उसकी सफलता, प्रतिभा, प्रतिष्ठा या उपलब्धि के कारण नीचे खींचने की कोशिश की जाती है।
यह हमेशा खुली दुश्मनी के रूप में सामने नहीं आता। कभी यह मज़ाक बनकर आता है, कभी व्यंग्य बनकर, कभी लगातार आलोचना के रूप में और कभी इस रूप में कि सामने वाले को उसकी सफलता के लिए ही अपराधबोध महसूस कराया जाए।
दूसरे की सफलता हमें क्यों परेशान करती है?
हर बार इसका कारण केवल ईर्ष्या नहीं होता। इसके पीछे तुलना, असुरक्षा, कम आत्मसम्मान, सामाजिक कंडीशनिंग और अपनी अधूरी आकांक्षाएँ भी हो सकती हैं।
जब हम किसी दूसरे व्यक्ति को आगे बढ़ते देखते हैं, तो कभी-कभी उसकी सफलता हमें अपनी उन इच्छाओं की याद दिलाती है जिन्हें हम पूरा नहीं कर पाए। तब सामने वाले की उपलब्धि प्रेरणा बनने के बजाय हमारे भीतर की असुरक्षा को छूने लगती है।
यहीं से एक अनकहा भाव जन्म ले सकता है—
“अगर यह इतना आगे नहीं बढ़ेगा, तो शायद मुझे अपनी कमी इतनी दिखाई नहीं देगी।”
और फिर हम अनजाने में उस व्यक्ति की ऊँचाई कम करने लगते हैं।
सबसे गहरी चोट अपने ही लोगों से लगती है
अजनबी की आलोचना अक्सर उतनी नहीं चुभती, जितनी अपने किसी करीबी की।
जिस दोस्त से हम अपनी खुशी बाँटना चाहते हैं, वही अगर कह दे- “तुम्हें तो बस मौका मिल गया था…”
जिस रिश्तेदार से प्रशंसा की उम्मीद हो, वही कह दे- “इतना भी कुछ खास नहीं किया…”
या किसी महिला की सफलता को उसकी मेहनत के बजाय उसके परिवार, परिस्थितियों या भाग्य से जोड़ दिया जाए तो व्यक्ति के भीतर एक सवाल जन्म लेता है, “क्या मेरी सफलता सचमुच स्वीकार करने लायक नहीं है?”
लगातार ऐसी प्रतिक्रियाएँ व्यक्ति के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकती हैं। विशेषकर बच्चों और किशोरों के लिए यह अनुभव अधिक संवेदनशील हो सकता है। यदि उनकी उपलब्धियों का लगातार मज़ाक उड़ाया जाए या उन्हें यह महसूस कराया जाए कि बहुत आगे बढ़ना दूसरों को पसंद नहीं आएगा, तो वे अपनी क्षमताओं को छिपाना तक सीख सकते हैं।
बच्चों को प्रतिस्पर्धा नहीं, सह-अस्तित्व सिखाइए

बचपन से ही हम बच्चों को बताते हैं “पहला आना है”, “सबसे आगे रहना है”, “दूसरे से बेहतर करना है।” प्रतिस्पर्धा अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन यदि सफलता का अर्थ केवल दूसरे से आगे निकलना बना दिया जाए, तो बच्चे दूसरे की उपलब्धि को अपनी हार समझने लग सकते हैं।
हमें उन्हें एक अलग भाषा सिखाने की आवश्यकता है—
“तुम्हारा दोस्त अच्छा कर रहा है, तो उससे सीखो।”
“किसी की सफलता तुम्हारी असफलता नहीं है।”
“दूसरे की जीत पर खुश होना भी एक उपलब्धि है।”
क्योंकि स्वस्थ व्यक्तित्व केवल स्वयं आगे बढ़ना नहीं जानता, वह दूसरों की सफलता को स्वीकार करना भी जानता है।
किसी को छोटा करके हम बड़े नहीं होते
जीवन में हर व्यक्ति का अपना समय, अपनी गति और अपनी यात्रा होती है। कोई जल्दी आगे बढ़ता है, कोई देर से; कोई शिक्षा में चमकता है, कोई कला में, कोई व्यवसाय में और कोई मानवीय संवेदनाओं में।
इसलिए किसी की ऊँचाई देखकर उसे काटने के बजाय हमें यह पूछना चाहिए- “क्या मैं उसकी सफलता से कुछ सीख सकता हूँ?”
एक फूल दूसरे फूल से प्रतिस्पर्धा नहीं करता। वह बस खिलता है।
शायद मनुष्य भी यही सीख सकता है—
दूसरे की रोशनी बुझाने से हमारी रोशनी तेज़ नहीं होती।
समाज तब सुंदर बनता है जब हम केवल अपनी उपलब्धियों का उत्सव नहीं मनाते, बल्कि दूसरों की सफलता के लिए भी दिल से जगह बनाते हैं।
किसी को नीचे खींचकर हम उसे छोटा कर सकते हैं,
लेकिन उसके साथ खड़े होकर हम अपने समाज को बड़ा बना सकते हैं।
और शायद Tall Poppy Syndrome को समझने की सबसे सुंदर शुरुआत यही है
किसी की ऊँचाई से परेशान होने के बजाय, उसकी उड़ान के लिए आसमान थोड़ा और बड़ा कर देना।

— डॉ. गार्गी पांडे
Child Psychologist | Counselor | Special Educator
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