बिहार में NEET परीक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी 350 छात्र और प्रदर्शनकारी अब जेलों से बाहर आ चुके हैं। बुधवार को पटना की बेऊर जेल सहित राज्य की विभिन्न जेलों से बड़ी संख्या में छात्रों की रिहाई हुई। जेल से बाहर आने के बाद इन छात्रों और उनके परिजनों ने पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं और अंदर की दर्दनाक दास्तां साझा की है।

​अपराधियों जैसा हुआ बर्ताव, दी गईं गालियां

​पटना विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष शांतनु शेखर भी बुधवार को बेऊर जेल से रिहाई पाने वालों में शामिल थे। जेल के बाहर उनके चेहरे पर कैद के दौरान झेले गए मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का साफ असर देखा जा सकता था।
​शांतनु ने आपबीती साझा करते हुए बताया कि उन्हें यह तक नहीं पता कि उन पर असल में क्या आरोप लगाए गए हैं। पुलिस की 18 गाड़ियां अचानक उनके घर पहुंचीं और उन्हें जबरन उठा ले गईं। 22 तारीख से जेल के अंदर छात्रों की स्थिति बेहद दयनीय थी। उन्हें अपराधियों के साथ रखा गया, उनके साथ अमानवीय बर्ताव किया गया और पुलिसकर्मी लगातार गालियां देते हुए जिंदगी बर्बाद करने की धमकी देते थे।

विधायक संदीप सौरभ की रिहाई और राजनीतिक प्रतिक्रिया

​छात्र आंदोलन का समर्थन करने वाले विधायक संदीप सौरभ को भी बुधवार देर रात जेल से रिहा कर दिया गया। जेल के बाहर उनके समर्थकों ने फूल-मालाओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया।
​इससे पहले जेल पहुंची उनकी पत्नी दिव्या ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि छात्रों के साथ इस तरह का क्रूर व्यवहार पूरी तरह से लोकतंत्र के खिलाफ है और सरकार को इस दमनकारी कार्रवाई का भारी राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

​दरभंगा में सभी 15 बालिग और नाबालिग भी हुए आजाद

​राजधानी पटना के अलावा अन्य जिलों में भी छात्रों की रिहाई का सिलसिला जारी रहा। दरभंगा में विरोध प्रदर्शन के दौरान कुल 33 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें 18 नाबालिग और 15 वयस्क शामिल थे। नाबालिगों को आवश्यक बॉन्ड पेपर भरवाकर पहले ही छोड़ दिया गया था, जबकि न्यायिक हिरासत में भेजे गए सभी 15 बालिगों को भी मंगलवार और बुधवार के बीच रिहा कर दिया गया। सुबह से शाम तक दरभंगा जेल के बाहर भी परिजनों की भारी भीड़ जुटी रही।