कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” को लेकर जबरदस्त राजनीतिक घमासान देखने को मिला, जहां राज्य की महिला मंत्रियों ने एक सुर में इस विधेयक को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया और इसके विरोध को महिलाओं की भावनाओं के साथ अन्याय करार दिया। सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने कहा कि यह विधेयक पास होता तो देश की राजनीति और सामाजिक संरचना में बड़ा बदलाव आता, क्योंकि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण मिलने से नेतृत्व में उनकी भागीदारी मजबूत होती। उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं—स्वच्छ भारत, उज्ज्वला और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ—का जिक्र करते हुए कहा कि इनसे महिलाओं के जीवन में वास्तविक बदलाव आया है और हरियाणा का लिंगानुपात भी बेहतर हुआ है।

महिलाएं आगे बढ़ें, इससे कुछ दलों को डर लगता है

वहीं स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए सवाल उठाया कि आखिर महिलाएं आगे बढ़ें, इससे कुछ दलों को डर क्यों लगता है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में इस अधिनियम का विरोध महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है और यह उनकी आकांक्षाओं को कुचलने जैसा है। आरती राव ने कहा कि आज महिलाएं विज्ञान, चिकित्सा, स्टार्टअप और रक्षा जैसे हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं, ऐसे में उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व से वंचित रखना गलत है।


योजनाओं के जरिए महिलाओं को मिल रही आर्थिक व सामाजिक मजबूती
दोनों मंत्रियों ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं, जिनमें उज्ज्वला योजना, जन धन योजना और मुद्रा योजना जैसी पहलें शामिल हैं। साथ ही हरियाणा सरकार द्वारा भी पंचायती राज संस्थाओं में 50% आरक्षण, लाडो लक्ष्मी योजना और सस्ती गैस जैसी योजनाओं के जरिए महिलाओं को आर्थिक व सामाजिक मजबूती दी जा रही है।

विधानसभा में यह मुद्दा सिर्फ नीति नहीं बल्कि सियासी टकराव का केंद्र बन गया, जहां सत्तापक्ष ने इसे देश की “मातृशक्ति को नेतृत्व में लाने का मौका” बताया, वहीं विपक्ष के विरोध को महिलाओं के खिलाफ बताया गया। महिला मंत्रियों ने साफ कहा कि देश की महिलाएं अब जागरूक हैं और इस मुद्दे पर राजनीतिक जवाब जरूर देंगी।