अमित पांडेय, खैरागढ़। नगर पालिका परिषद खैरागढ़ एक बार फिर गंभीर अनियमितताओं को लेकर चर्चा में है। विकास कार्यों से ज्यादा इन दिनों भुगतान, खरीदी और कथित गड़बड़ियों के मामलों ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थिति ऐसी है कि “ऊपर से सब ठीक, भीतर से सब गड़बड़” जैसी छवि सामने आ रही है।

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ताजा मामला सरकार की महत्वाकांक्षी पौनी पसारी योजना से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2019-20 में सामान्य सभा की बैठक में पिपरिया वार्ड और इतवारी बाजार वार्ड में बाजार निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया था। संकल्प क्रमांक-10 के तहत एसडीएम को भूमि आबंटन और शासन को सूचना भेजने का निर्णय लिया गया था। पूरी प्रक्रिया कागजों में नियमों के अनुसार आगे बढ़ी, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल अलग नजर आई।

पिपरिया के नाम पर स्वीकृति, निर्माण इतवारी बाजार में

जहां पिपरिया वार्ड में बाजार बनना प्रस्तावित था, वहां आज तक कोई निर्माण नहीं हुआ। इसके विपरीत, करीब चार किलोमीटर दूर इतवारी बाजार में पूरा निर्माण कर दिया गया। सबसे गंभीर बात यह है कि टेंडर और अनुबंध दस्तावेजों में निर्माण स्थल पिपरिया ही दर्ज रहा, लेकिन बिना सक्षम अनुमति के स्थल परिवर्तन कर दिया गया।

दस्तावेजों के अनुसार सितंबर 2021 में निविदा प्रक्रिया शुरू हुई, फरवरी 2022 में कार्य एजेंसी से अनुबंध किया गया और तीन महीने में निर्माण पूरा कर भुगतान भी कर दिया गया। भुगतान के दौरान टीडीएस और जीएसटी की कटौती भी की गई, लेकिन मूल सवाल यही है कि स्वीकृत स्थल बदलकर निर्माण कैसे किया गया।

पिपरिया के लोगों को नहीं मिला लाभ

इस गड़बड़ी का सीधा असर पिपरिया वार्ड के निवासियों पर पड़ा है, जहां के लोग आज भी सड़क किनारे कारोबार करने को मजबूर हैं। योजना का लाभ उन्हें नहीं मिल सका, जबकि सुविधा कहीं और विकसित कर दी गई।

पहले भी उठ चुके हैं ऐसे मामले

यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले बरेठपारा वार्ड में नाली और सीसी रोड निर्माण में भी स्थल परिवर्तन के आरोप सामने आ चुके हैं। इससे यह संकेत मिल रहा है कि नगर पालिका में कामों का स्थान बदलना अब अपवाद नहीं, बल्कि एक चलन बनता जा रहा है।

36 लाख की मशीन भी सवालों के घेरे में

इसके अलावा 2021 में खरीदी गई 1000 किलोग्राम क्षमता की लगभग 36 लाख रुपये की कंपोस्ट मशीन भी विवादों में है। मशीन खरीदी तो गई, लेकिन आज तक चालू नहीं हो सकी। इसके बावजूद मरम्मत के नाम पर कई बार भुगतान किए जाने के आरोप हैं।

खरीदी प्रक्रिया में भी गंभीर खामियां सामने आई हैं, जहां निविदा समिति के अध्यक्ष सीएमओ की भूमिका सीमित बताई जा रही है और पूरी प्रक्रिया अन्य स्तर पर संचालित की गई। टैक्स कटौती जैसे नियमों की अनदेखी ने मामले को और संदिग्ध बना दिया है।

देखें दस्तावेज

विपक्ष ने की जांच की मांग

लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बाद नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल गहराते जा रहे हैं। विपक्ष ने सभी निर्माण कार्यों की स्थल जांच और भौतिक सत्यापन की मांग उठाई है। साथ ही उच्च स्तर पर शिकायत कर कार्रवाई की बात भी कही गई है।

फिलहाल खैरागढ़ नगर पालिका की छवि “कागजों में विकास, जमीन पर सवाल” जैसी बनती नजर आ रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच में सच्चाई सामने आती है या मामला एक बार फिर फाइलों में दबकर रह जाता है।

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