दिल्ली में राजनीतिक हलचल के बीच अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) अपने पार्टी नेताओं के साथ राजघाट पहुंचे। यह दौरा जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से जुड़े एक मामले को लेकर जताए गए विरोध और “सत्याग्रह” के रूप में बताया जा रहा है। केजरीवाल के साथ मनीष सिसोदिया, आतिशी और अन्य आम आदमी पार्टी के नेता भी मौजूद रहे। नेताओं ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और वहां अपनी बात रखते हुए प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वे देश की न्यायपालिका का पूरा सम्मान करते हैं और आज देश में जो स्वतंत्रता और व्यवस्था है, वह न्याय प्रणाली के कारण ही संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो गई हैं कि उन्हें “सत्याग्रह” का सहारा लेना पड़ रहा है।

केजरीवाल के अनुसार, इस मामले से जुड़ी सभी बातें उन्होंने एक पत्र के माध्यम से संबंधित जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को भेज दी हैं। उन्होंने इसे बेहद संवेदनशील मामला बताते हुए कहा कि वे इस पर सार्वजनिक रूप से अधिक टिप्पणी नहीं करना चाहते। केजरीवाल ने सुबह सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी थी कि वह दोपहर 12 बजे मनीष सिसोदिया के साथ “बापू का आशीर्वाद” लेने राजघाट जाएंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार वे आतिशी और अन्य आम आदमी पार्टी नेताओं के साथ वहां पहुंचे। राजघाट पर पहले केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी, इसके बाद अन्य नेताओं ने भी पुष्प अर्पित कर सम्मान प्रकट किया।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ सत्याग्रह

अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने दिल्ली हाई कोर्ट की जज स्वर्णकांता शर्मा का बहिष्कार करने का ऐलान किया है। दोनों नेताओं ने इस कदम को “सत्याग्रह” करार दिया है और कहा है कि उन्हें अब इस मामले में न्याय की उम्मीद नहीं है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने पहले अपनी बात अदालत के सामने रखी थी, लेकिन उनकी दलीलें खारिज कर दी गईं। इसके बाद, उनके अनुसार, विरोध के रूप में “सत्याग्रह” ही एकमात्र विकल्प बचा था। उन्होंने इसे महात्मा गांधी के बताए रास्ते से प्रेरित बताया। केजरीवाल और सिसोदिया दोनों ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है, इसलिए उन्होंने अदालत में पेश न होने का निर्णय लिया है।

अब तक क्या हुआ

कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले में कानूनी लड़ाई एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। हाल ही में ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 23 नेताओं को आरोप मुक्त कर दिया था। इस आदेश को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है। यह केस जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच के सामने सूचीबद्ध किया गया है। इसी पर आपत्ति जताते हुए केजरीवाल ने मामले की सुनवाई किसी अन्य बेंच में कराने की मांग की थी। अरविंद केजरीवाल ने इसके लिए हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र भी लिखा था, लेकिन अनुरोध स्वीकार नहीं होने पर उन्होंने रिक्यूजल याचिका दाखिल की। यह याचिका भी खारिज कर दी गई। याचिका खारिज होने के बाद केजरीवाल ने विरोध के तौर पर “सत्याग्रह” का रास्ता अपनाने का ऐलान किया है। उन्होंने इसे अपने अनुसार न्याय के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष बताया है। केजरीवाल और उनकी टीम ने संकेत दिए हैं कि वे इस फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया जाने पर भी विचार कर रहे हैं।

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