केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि पेट्रोल और डीजल पर चलने वाले वाहनों का लंबे समय तक कोई भविष्य नहीं है. मंत्री का ये बयान वैकल्पिक ईंधन विकल्पों के समर्थन में आया है. उन्होंने ऑटोमोबाइल उद्योग से स्वच्छ ईंधनों की ओर बदलाव पर काम करने को कहा. उन्होंने कहा कि ये गाड़ियां हमेशा नहीं रहेंगी, ऑटो इंडस्ट्री को साफ-सुथरे ईंधन और बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट की ओर तेजी से बढ़ना चाहिए. 

नितिन गडकरी ने कहा कि आने वाला समय मल्टी-फ्यूल का होगा, यानी एक ही तरह के फ्यूल पर निर्भर रहने के बजाय कई तरह के ईंधन का इस्तेमाल किया जाएगा.

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ऑटोमोबाइल सेक्टर को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि पेट्रोल और डीजल इंजन का भविष्य अब सीमित है. उन्होंने वाहन निर्माताओं से आग्रह किया कि वे केवल कम कीमत पर ध्यान देने के बजाय बेहतर गुणवत्ता को प्राथमिकता दें. केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने Busworld India Conclave 2026 में कहा  कि पेट्रोल और डीजल से चलने वाली गाड़ियों का भविष्य नहीं है.

गडकरी ने बताया कि भविष्य में इलेक्ट्रिक गाड़ियां, बायोफ्यूल, CNG, LNG और हाइड्रोजन जैसे ईंधन ज्यादा महत्वपूर्ण होंगे. इलेक्ट्रिक गाड़ियां बैटरी से चलती हैं और इनमें धुआं नहीं निकलता, इसलिए ये पर्यावरण के लिए बेहतर मानी जाती हैं. वहीं बायोफ्यूल (जैसे एथेनॉल) खेती से जुड़े उत्पादों से बनाया जा सकता है, जिससे किसानों को भी फायदा होता है. इसके अलावा हाइड्रोजन को भी भविष्य का ईंधन माना जा रहा है क्योंकि इससे सिर्फ पानी बनता है, प्रदूषण नहीं होता है.

नितिन गडकरी ने यह भी कहा कि आने वाला समय मल्टी-फ्यूल का होगा, यानी एक ही तरह के फ्यूल पर निर्भर रहने के बजाय कई तरह के ईंधन का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे फायदा यह होगा कि अगर किसी एक फ्यूल की कीमत बढ़े या कमी हो, तो दूसरे विकल्प मौजूद रहेंगे.

सरकार का मानना है कि आज जो पेट्रोल और डीजल की गाड़ियां हम चला रहे हैं, वे कई समस्याएं पैदा करती हैं. सबसे बड़ी समस्या प्रदूषण है. इसके अलावा भारत को पेट्रोल और डीजल का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदना पड़ता है, जिससे देश का बहुत पैसा बाहर जाता है.

सरकार चाहती है कि ऑटो कंपनियां अभी से इन नई तकनीकों पर काम करें, ताकि भविष्य के लिए तैयार रहें. अगर कंपनियां समय रहते बदलाव नहीं करेंगी, तो उन्हें आगे चलकर नुकसान हो सकता है क्योंकि बाजार की मांग बदल जाएगी. ऐसे में कहा जा सकता है कि आने वाले सालों में पेट्रोल और डीजल गाड़ियों का इस्तेमाल धीरे-धीरे कम होता जाएगा और उनकी जगह इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और दूसरे फ्यूल से चलने वाली गाड़ियां ले लेंगी. 

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