पाकिस्तान में न्यायपालिका और सरकार के रिश्तों को लेकर एक नया विवाद सामने आया है. इस्लामाबाद हाईकोर्ट के जज मोहसिन अख्तर कयानी को अचानक पद से हटा दिया गया, जिसके बाद सियासी हलकों में बहस तेज हो गई है. यह फैसला उस समय आया जब उन्होंने एक सुनवाई के दौरान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को अदालत में तलब करने की बात कही थी. इसके एक घंटे बाद ही उन्हें कुर्सी से हटा दिया गया.
पाकिस्तान की सरकार ने तीन ऐसे जजों का तबादला कर दिया है, जो उसके खिलाफ लगातार फैसला सुना रहे थे. इस्लामाबाद हाईकोर्ट के एक जज ने तो मंगलवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को तलब करने की बात कही थी.
पाकिस्तान की इस्लामाबाद हाईकोर्ट के एक जज को इसलिए पद से हटा दिया गया, क्योंकि उन्होंने एक मामले की सुनवाई के दौरान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को तलब करने की बात कही थी. जज का नाम मोहसिन अख्तर कयानी है. पाकिस्तान के सियासी गलियारों में सरकार के इस फैसले की खूब चर्चा हो रही है. हालांकि, पाकिस्तान सरकार के कानून विभाग ने इसे एक सामान्य तबादला बताया है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान टेलीकम्युनिकेशन अथॉरिटी में वित्तीय सदस्य की नियुक्ति से जुड़े मामले की सुनवाई इस्लामाबाद हाईकोर्ट में चल रही थी. इस दौरान जस्टिस कयानी ने सरकार के वकील से नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि 18 मई तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तो वह प्रधानमंत्री को अदालत में पेश होने के लिए बुला सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मामले को लंबे समय से टाला जा रहा है और सरकार की नीयत पर सवाल उठते हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक इस सुनवाई के खत्म होने के एक घंटे बाद जज कयानी को इस्लामाबाद हाईकोर्ट से हटा दिया गया. कयानी को अब लाहौर हाईकोर्ट भेज दिया गया है. दिलचस्प बात है कि कयानी के ट्रांसफर को लेकर ज्यूडिशियल कमीशन के कई सदस्य सहमत नहीं थे. हालांकि, बहुमत के जरिए एक प्रस्ताव लाया गया और उन्हें इस्लामाबाद हाईकोर्ट से हटा दिया गया.
पाकिस्तान सरकार के मुताबिक कयानी के अलावा जस्टिस बाबर सत्तार का भी तबादला किया गया है. उन्हें लाहौर से पेशावर हाईकोर्ट भेजा गया है. इसके अलावा जस्टिस रफत इम्तियाज को सिंध हाईकोर्ट में तैनाती दी गई हैं. कयानी की जगह पर अभी इस्लामाबाद हाईकोर्ट में किसी की भी तैनाती नहीं की गई है.
आपको बताते चले कि पाकिस्तान की जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश की ज्यूडिशरी को सरकार का खिलौना बताया था. इमरान के मुताबिक जज न्याय नहीं कर पा रहे हैं. उन्हें जिस काम के लिए रखा गया है, उसे ही नहीं कर पा रहे हैं. इस पूरे घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर बहस फिर तेज हो गई है. पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पहले भी आरोप लगा चुके हैं कि देश की न्यायपालिका पर सरकार और अन्य संस्थानों का प्रभाव बढ़ रहा है.
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