कुंदन कुमार/पटना। बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री सह विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रभारी मंत्री विजय कुमार चौधरी ने विभाग की कार्यप्रणाली और भविष्य के रोडमैप पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज की वैश्विक व्यवस्था पूरी तरह से विज्ञान और नवाचार पर टिकी है। ऐसे में इस विभाग की भूमिका बिहार के नवनिर्माण में सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है।
प्रतिभा और संसाधनों का पलायन रोकना प्राथमिकता
विजय कुमार चौधरी ने पुरानी चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय था जब बिहार के मेधावी छात्र तकनीकी शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख करने को मजबूर थे। इससे न केवल बिहार की प्रतिभा बाहर जा रही थी, बल्कि राज्य का आर्थिक संसाधन भी दूसरे प्रदेशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार ने इस विसंगति को दूर करने का बीड़ा उठाया और आज परिणाम सबके सामने हैं।
सात निश्चय: हर जिले को मिला इंजीनियरिंग कॉलेज
सरकार की दूरदर्शी नीति ‘सात निश्चय’ की चर्चा करते हुए प्रभारी मंत्री ने कहा कि अब बिहार के बच्चों को घर से दूर जाने की आवश्यकता नहीं है। सरकार ने संकल्प लिया था कि राज्य के प्रत्येक जिले में कम से कम एक इंजीनियरिंग और एक पॉलिटेक्निक कॉलेज खोला जाएगा। आज छात्र अपने ही जिले में उच्च स्तरीय तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जिससे उनके समय और धन दोनों की बचत हो रही है।
आईआईटी पटना के सहयोग से ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’
तकनीकी शिक्षा को आधुनिक बनाने के लिए बिहार में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना की गई है। उपमुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि ये केंद्र आईआईटी (IIT) पटना के तकनीकी सहयोग से संचालित हो रहे हैं। कुल निर्धारित 33 केंद्रों में से 23 का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जो राज्य के युवाओं को अत्याधुनिक मशीनों और तकनीक पर शोध व प्रशिक्षण की सुविधा प्रदान कर रहे हैं।
प्रगति की नई आधारशिला
अंत में उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल का विस्तार जल्द होने वाला है, लेकिन प्रभारी मंत्री के रूप में उन्हें इस विभाग की उपलब्धियों को साझा करने का अवसर मिला है। बिहार जिस तीव्र गति से विकास पथ पर अग्रसर है, उसमें विज्ञान और तकनीकी शिक्षा विभाग का योगदान अद्वितीय है। यह विभाग केवल एक सरकारी ढांचा नहीं, बल्कि बिहार के स्वर्णिम भविष्य की मजबूत आधारशिला है।
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