भिवानी में रेल सुविधाओं की घोर उपेक्षा हो रही है, जहाँ पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के बाद विकास थम सा गया है। ट्रेनों के बंद होने और बुनियादी ढांचे के विस्तार न होने से यात्रियों में भारी नाराजगी है।

अजय सैनी, भिवानी। जिले में रेल सुविधाओं के विस्तार को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल के कार्यकाल के बाद से भिवानी जंक्शन की लगातार अनदेखी की जा रही है। बंसीलाल के समय में जहां भिवानी-रोहतक ब्रॉड गेज लाइन और आधुनिक जंक्शन जैसी उपलब्धियाँ हासिल हुईं, वहीं पिछले दो दशकों में यहाँ की सुविधाओं में विस्तार के बजाय गिरावट देखी गई है। वर्तमान में स्थिति यह है कि कई महत्वपूर्ण रेलगाड़ियों के मार्ग बदल दिए गए हैं या उन्हें बंद कर दिया गया है, जिससे दैनिक यात्रियों और श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इच्छाशक्ति की कमी और ट्रेनों का बंद होना

भिवानी वासियों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की कमजोर इच्छाशक्ति के कारण कोरोना काल के बाद कई महत्वपूर्ण सेवाएं बहाल नहीं हो सकीं। भिवानी से कालका के बीच चलने वाली एकता एक्सप्रेस (14795/96) को तीन साल के लंबे संघर्ष के बाद तत्कालीन सांसद डॉ. अरविंद शर्मा के प्रयासों से फिर से शुरू किया गया, लेकिन भिवानी एक्सप्रेस (14085/86) जैसी महत्वपूर्ण गाड़ियों का मार्ग बदलना शहरवासियों के लिए एक ‘तुगलकी’ फैसला साबित हुआ। इसके स्थान पर चलाई गई पैसेंजर ट्रेन में न केवल कोच कम हैं, बल्कि समय की बर्बादी के कारण करीब 6,000 दैनिक यात्रियों की समस्या और अधिक जटिल हो गई है। खाटू श्याम जाने वाले भक्तों के लिए भी लंबे समय बाद ‘ढहर का बालाजी’ ट्रेन शुरू हो पाई, जो यह दर्शाता है कि बिना कड़े संघर्ष के यहाँ सुविधा मिलना नामुमकिन हो गया है।

बुनियादी ढांचे का अभाव और भविष्य की चुनौती

भिवानी जंक्शन पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव भी एक बड़ा मुद्दा है। लंबी दूरी की ट्रेनों के संचालन के लिए यहां 26 कोच वाली वाशिंग लाइन और कम से कम 6 प्लेटफॉर्म की सख्त आवश्यकता है। फिलहाल यहां केवल 3 प्लेटफॉर्म हैं और रेलवे अधिकारियों द्वारा 6 के स्थान पर केवल 5 प्लेटफॉर्म बनाने का निर्णय लिया गया है, जिसे स्थानीय लोग जंक्शन की उपेक्षा मान रहे हैं। लगातार तीसरी बार चुने गए क्षेत्रीय सांसद की इस मामले पर ‘गहरी खामोशी’ ने जनता के बीच भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा कर दी है। शहरवासियों का मानना है कि यदि जल्द ही ठोस पैरवी नहीं की गई, तो भिवानी रेल मानचित्र पर और अधिक पिछड़ जाएगा।