हिसार के पर्वतारोही रोहताश खिलेरी माउंट एवरेस्ट के 'डेथ ज़ोन' में 24 घंटे बिताने का लक्ष्य लेकर रवाना हुए हैं। वह नेपाल के बाबुश्री शेरपा का 21 घंटे का पुराना रिकॉर्ड तोड़कर नया कीर्तिमान स्थापित करना चाहते हैं।
हिसार। जिले के छोटे से गांव मलापुर के रहने वाले साहसी पर्वतारोही रोहताश खिलेरी ने एक बार फिर इतिहास रचने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर 24 घंटे बिताने का महा-लक्ष्य लेकर रोहताश अपने घर से निकल चुके हैं। यात्रा की शुरुआत उन्होंने अपनी मां के चरण स्पर्श कर और उनका आशीर्वाद लेकर की, जिसका भावुक वीडियो उन्होंने सोशल मीडिया पर भी साझा किया है। रोहताश का यह मिशन महज एक चढ़ाई नहीं, बल्कि ‘डेथ ज़ोन’ कहे जाने वाले ऊंचाई वाले इलाके में तिरंगा फहराने और दुनिया का पहला ऐसा व्यक्ति बनने का जुनून है जो इतनी देर वहां टिक सके।
पुराने रिकॉर्ड को चुनौती और आगामी जोखिम
रोहताश खिलेरी का मुख्य उद्देश्य नेपाल के बाबुश्री शेरपा द्वारा वर्ष 1999 में बनाए गए 21 घंटे के रिकॉर्ड को तोड़ना है। एवरेस्ट के शिखर पर 24 घंटे बिताना अत्यधिक जोखिम भरा है, क्योंकि वहां तापमान शून्य से 60-70 डिग्री नीचे तक गिर जाता है और ऑक्सीजन की भारी कमी होती है। रोहताश ने इससे पहले जनवरी 2026 में यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस पर -43 डिग्री तापमान में 24 घंटे बिताकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। उनके पास माउंट किलिमंजारो पर भी 24 घंटे रुकने का अनुभव है, जो उन्हें इस कठिन चुनौती के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करता है।
बिश्नोई समाज का संदेश और भविष्य की राह
अपनी पिछली यात्राओं की तरह, रोहताश इस बार भी पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकता का संदेश लेकर चले हैं। 16 मई 2018 को पहली बार एवरेस्ट फतह करने वाले रोहताश अब तक किलिमंजारो, एलब्रुस, और माउंट फ्रेंडशिप जैसी कई चोटियों पर अपनी धाक जमा चुके हैं। इस मिशन की सफलता न केवल रोहताश के नाम एक और वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज करेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान भी बढ़ाएगी। देशभर के लोग और उनका बिश्नोई समाज उनकी सलामती और इस ऐतिहासिक सफलता के लिए दुआएं कर रहा है।

