श्रीलंका की उच्चायुक्त महिशिनी कोलोन ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर कुरुक्षेत्र स्थित श्रीकृष्ण संग्रहालय का भ्रमण किया। उन्होंने हरियाणा में मौजूद बौद्ध धर्म के ऐतिहासिक अवशेषों को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया।

कुरुक्षेत्र। बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रीलंका की उच्चायुक्त महिशिनी कोलोन शुक्रवार को धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र पहुंचीं। यहां उन्होंने श्रीकृष्ण संग्रहालय का अवलोकन किया और भारत में बौद्ध धर्म से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण की सराहना की। उच्चायुक्त ने कहा कि भारत और हरियाणा सरकार ने गौतम बुद्ध से जुड़े इन स्थलों को संजोकर आने वाली पीढ़ियों के लिए आपसी भाईचारे और बौद्ध शिक्षाओं के प्रसार का मार्ग प्रशस्त किया है। कुरुक्षेत्र आगमन पर म्यांमार से आए बौद्ध भिक्षु आनंदा और उनके साथियों ने उच्चायुक्त से एक 34 वर्ष पुराने पीपल के वृक्ष के नीचे पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना करवाई।

हरियाणा के ऐतिहासिक बौद्ध स्थलों की ली विस्तृत जानकारी

श्रीकृष्ण संग्रहालय के अवलोकन के दौरान उच्चायुक्त महिशिनी कोलोन ने हरियाणा के विभिन्न जिलों में फैले बौद्ध विरासतों के बारे में गहराई से जाना। संग्रहालय के सीईओ पंकज सेतिया ने उन्हें करनाल के असंध स्तूप की पुरातात्विक संरचना, अग्रोहा के प्राचीन टीले से प्राप्त बौद्ध अवशेषों और यमुनानगर के सुघ (प्राचीन श्रुघ्न) के बारे में विस्तार से बताया। उच्चायुक्त ने अलेक्जेंडर कनिंघम के शोध, चीनी यात्री ह्वेनसांग के वृत्तांतों और प्राचीन बौद्ध ग्रंथों में हरियाणा के उल्लेख पर विशेष रुचि दिखाई। उन्हें बताया गया कि यमुनानगर का चनेटी स्तूप और टोपरा कलां का धर्मचक्र आज भी बौद्ध गतिविधियों और प्राचीन भारतीय वैभव के जीवंत प्रमाण हैं।

धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक संबंधों को मिलेगा बढ़ावा

संग्रहालय का भ्रमण करने के बाद उच्चायुक्त महिशिनी कोलोन यमुनानगर स्थित चनेटी स्तूप और टोपरा कलां के धर्मचक्र दर्शन के लिए रवाना हुईं। उन्होंने हरियाणा में सिद्धार्थ गौतम बुद्ध के भ्रमण से जुड़े स्थलों को नई पहचान देने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कदम वैश्विक स्तर पर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देंगे। अधिकारियों ने बताया कि करनाल के असंध स्तूप जैसे स्थलों से विभिन्न कालों के अवशेष प्राप्त हुए हैं, जो यह सिद्ध करते हैं कि यह क्षेत्र प्राचीन काल में बौद्ध संस्थानों से युक्त एक समृद्ध केंद्र था। इस यात्रा से श्रीलंका और भारत के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।