कुमार उत्तम/मुजफ्फरपुर। जिले में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर खौफ का नया तरीका अपनाते हुए एक व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का शिकार बनाया। ठगों ने खुद को पुलिस और सीबीआई (CBI) अधिकारी बताकर भोला प्रसाद महतो से करीब 17 लाख रुपये की मोटी रकम उनके बैंक अकाउंट से ट्रांसफर करवा ली। हालांकि, पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह के तीन सदस्यों को दबोच लिया है।

​ऐसे बिछाया गया डिजिटल अरेस्ट का जाल

​पीड़ित भोला प्रसाद महतो को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क किया गया। फोन करने वालों ने खुद को सीबीआई और पुलिस का आला अधिकारी बताया। उन्होंने पीड़ित को किसी गंभीर मामले में संलिप्त होने का डर दिखाया और ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी देकर दबाव बनाया। डर के मारे पीड़ित ने अपने खाते से 17 लाख रुपये ठगों द्वारा बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए।

​एसएसपी के निर्देश पर गठित हुई विशेष टीम

​जैसे ही इस ठगी की जानकारी सीनियर एसपी कांतेश मिश्रा को मिली, उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया। सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी की देखरेख में एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस पूरे जांच अभियान का नेतृत्व साइबर डीएसपी रोहन कुमार ने किया। साइबर थाने में कांड संख्या 58/26 दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू की गई।

​पुलिस की जाल में फंसे तीन शातिर ठग

​पुलिस ने उन बैंक खातों की बारीकी से जांच की जिससे पैसा कटा था और जिनमें पैसा भेजा गया था। तकनीकी सुरागों का पीछा करते हुए पुलिस ने जाल बिछाया और तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए अपराधियों की पहचान इस प्रकार है:

  • ​बृजेश कुमार (गरौल, वैशाली)
  • ​कृष्ण कुमार (गरौल, वैशाली)
  • ​विक्रम कुमार (मुजफ्फरपुर)
  • ​विक्रम कुमार को उस समय गिरफ्तार किया गया जब उसके पास ठगी में इस्तेमाल किए गए डेबिट कार्ड, मोबाइल और संदिग्ध बैंक अकाउंट से जुड़े दस्तावेज मौजूद थे।

​बरामदगी और आगे की कार्रवाई

​पुलिस ने गिरफ्तार ठगों के पास से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामान बरामद किया है, जिसमें शामिल हैं:

  • ​विभिन्न बैंकों के 13 पासबुक और चेकबुक।
  • ​3 मोबाइल फोन।
  • ​3 डेबिट कार्ड और बैंक से संबंधित कई अन्य कागजात।

​अन्य राज्यों से जुड़े हैं तार

​सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि इन अपराधियों का जाल केवल बिहार तक ही सीमित नहीं है। इनके दूसरे राज्यों से कनेक्शन और उनके पुराने आपराधिक इतिहास को खंगाला जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि यह एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का हिस्सा हो सकते हैं। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है।