अजय सैनी ,भिवानी। पंडित नेकीराम शर्मा मेडिकल कॉलेज एक बार फिर विवादों में घिरता नजर आ रहा है। अभी तक कॉलेज की विधिवत शुरुआत भी नहीं हुई है, लेकिन यहां अव्यवस्था, सुरक्षा में लापरवाही, कथित घोटालों और दलाली के आरोपों ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
भवन निर्माण पर उठे सवाल
करीब दो साल पहले बने मेडिकल कॉलेज भवन की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में हुई बारिश के दौरान कई जगहों पर पानी का रिसाव देखने को मिला, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर संदेह गहरा गया है।
लाखों का सामान चोरी, सुरक्षा पर सवाल
गत 1 और 2 मार्च की मध्यरात्रि को कॉलेज परिसर से भारी भरकम जेनरेटर का महंगा सामान चोरी होने का मामला सामने आया। घटना की सूचना पुलिस को दी गई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
सवाल यह भी उठ रहा है कि सुरक्षा कर्मचारी आखिर उस समय क्या कर रहे थे।
जिम्मेदारी को लेकर टकराव
चोरी की घटना के बाद कॉलेज प्रशासन और संबंधित कंपनी के बीच जिम्मेदारी को लेकर विवाद सामने आया है। जहां प्रशासन का कहना है कि उन्होंने जेनरेटर सेट को आधिकारिक रूप से अपने अधीन नहीं लिया था, वहीं कंपनी का दावा है कि स्थापना के बाद सुरक्षा की जिम्मेदारी कॉलेज की थी।
भर्ती में दलाली के आरोप
मेडिकल कॉलेज में कथित तौर पर दलाल सक्रिय होने की चर्चाएं हैं, जो नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये लेने का खेल खेल रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ और अन्य पदों पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर लोगों को झांसा दिया जा रहा है, जबकि आधिकारिक प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है।
खरीद-फरोख्त में अनियमितता की आशंका
कॉलेज के लिए वाहन किराये पर लेने के मामले में भी गड़बड़ी के आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि अधिकृत एजेंसी को दरकिनार कर किसी अन्य माध्यम से वाहन व्यवस्था की गई और बिल पहले ही प्रस्तुत कर दिए गए।
उच्च अधिकारियों की चुप्पी
इन तमाम आरोपों के बावजूद चंडीगढ़ स्थित उच्च अधिकारियों की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे पूरे मामले पर पर्दा डालने की आशंका भी जताई जा रही है।
पुराने विवादों से भी जुड़ रहे तार
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कुछ विवादित लोग पहले भी स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मामलों में चर्चाओं में रहे हैं और अब फिर सक्रिय हो गए हैं।
प्रशासन से संपर्क नहीं हो सका
मामले में कॉलेज के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. धीरज परिहार से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। बताया जा रहा है कि उनका कार्यकाल हाल ही में समाप्त हुआ है, जिसके बाद नई प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी बाकी है।
बड़ा सवाल
मेडिकल कॉलेज के औपचारिक रूप से शुरू होने से पहले ही यदि इस तरह के आरोप सामने आ रहे हैं, तो क्या भविष्य में यहां की व्यवस्था पारदर्शी और सुरक्षित रह पाएगी?
अब सभी की नजर प्रशासन और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

