दिल्ली/पटना। बिहार की राजनीति में इस वक्त दिल्ली का गलियारा केंद्र बिंदु बना हुआ है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपने दिल्ली दौरे के दौरान मिशन ‘मंत्रिमंडल विस्तार’ को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इसी क्रम में उन्होंने शनिवार देर रात केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की, जिसकी तस्वीरें साझा करते हुए उन्होंने इसे विकसित बिहार के विजन पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण संवाद बताया। इसके तुरंत बाद, सम्राट चौधरी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की, जिसे बिहार सरकार के भविष्य और मंत्रिमंडल की नई रूपरेखा के लिहाज से बेहद निर्णायक माना जा रहा है।

​शाह के साथ पहली औपचारिक बैठक और एजेंडा

​मुख्यमंत्री का पदभार संभालने के बाद अमित शाह के साथ यह उनकी पहली औपचारिक मुलाकात है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक का मुख्य एजेंडा लंबे समय से लंबित मंत्रिमंडल विस्तार है। बैठक में न केवल नए मंत्रियों के नामों पर विचार-विमर्श हुआ, बल्कि सरकार के आगामी रोडमैप और राज्य के विकास से जुड़े गंभीर मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। माना जा रहा है कि इस मुलाकात के बाद अब कैबिनेट विस्तार की फाइल अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

​नीतीश कुमार से मशवरा और गठबंधन का गणित

​दिल्ली रवाना होने से ठीक पहले सम्राट चौधरी ने पटना में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके आवास पर करीब आधे घंटे तक गुप्त मंत्रणा की थी। इस बातचीत को आगामी विस्तार में जदयू और भाजपा के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। यह स्पष्ट संकेत है कि नए मंत्रिमंडल के गठन में गठबंधन के सभी प्रमुख नेताओं की सहमति और उनकी भूमिका को प्राथमिकता दी जा रही है।

​जातीय समीकरण और युवा जोश पर फोकस

​नई कैबिनेट के स्वरूप को लेकर चर्चा है कि इस बार भाजपा और जदयू दोनों ही खेमे जातीय संतुलन पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। आगामी चुनावों को देखते हुए मंत्रिमंडल में अनुभव और नए चेहरों का एक संतुलित मिश्रण देखने को मिल सकता है। सूत्रों का दावा है कि इस बार महिलाओं और युवाओं को पहले के मुकाबले अधिक भागीदारी दी जाएगी, ताकि प्रशासन में नई ऊर्जा और सामाजिक समावेश का संदेश दिया जा सके।

​बंगाल चुनाव के बाद होगा औपचारिक ऐलान

​राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि मंत्रिमंडल विस्तार की घोषणा पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों के ठीक बाद किसी भी समय की जा सकती है। पार्टी और सरकार दोनों ही स्तरों पर तैयारियां अपने चरम पर हैं। फिलहाल, दिल्ली में हुई इन मुलाकातों के बाद बिहार की नई कैबिनेट की तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है, जिसका औपचारिक ऐलान अब बस कुछ ही दिनों की दूरी पर है।