गोपालगंज। जिले में शिक्षा विभाग ने अनुशासन और पारदर्शिता की दिशा में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू की है। ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर ऑनलाइन हाजिरी में बड़े पैमाने पर धांधली पकड़े जाने के बाद जिले के 5639 हेडमास्टर और शिक्षकों पर गाज गिरी है। जांच में खुलासा हुआ है कि शिक्षक स्कूल पहुंचने के बजाय घर बैठे या स्कूल परिसर से कोसों दूर रहकर ऐप के जरिए उपस्थिति दर्ज कर रहे थे।
तकनीक का दुरुपयोग: 100 किमी दूर से लगाई हाजिरी
विभागीय डेटा विश्लेषण में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। जांच में पाया गया कि कुछ शिक्षकों ने स्कूल से 100 किलोमीटर की दूरी पर रहते हुए भी पोर्टल पर खुद को उपस्थित दर्ज कर लिया। जिला शिक्षा पदाधिकारी के अनुसार, प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों तक के हजारों शिक्षकों की उपस्थिति संदिग्ध मिली है। यह स्पष्ट रूप से तकनीक के साथ छेड़छाड़ और विभागीय नियमों का उल्लंघन है।
72 घंटे का अल्टीमेटम और वेतन पर रोक
इस बड़ी धोखाधड़ी के उजागर होने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) योगेश कुमार ने सख्त रुख अपनाया है। सभी दोषी शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों से 72 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि यदि तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो संबंधित शिक्षकों का वेतन रोक दिया जाएगा और उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की जाएगी। इस नोटिस के बाद शिक्षा विभाग के कार्यालय में जवाब देने के लिए शिक्षकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है।
जांच में हुआ इन गड़बड़ियों का खुलासा
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, गड़बड़ियों का वर्गीकरण कुछ इस प्रकार है:
- बिना सूचना नदारद: लगभग 2400 शिक्षक बिना किसी पूर्व सूचना के स्कूल से गायब पाए गए।
- देरी से आगमन: 2794 शिक्षकों ने निर्धारित समय बीतने के काफी देर बाद अपनी उपस्थिति दर्ज की।
- फर्जी ऑन-ड्यूटी: करीब 445 शिक्षकों ने खुद को ‘ऑन ड्यूटी’ दिखाया, लेकिन वे कार्यस्थल पर मौजूद नहीं थे।
जनगणना का बहाना नहीं चलेगा
कई शिक्षकों ने स्पष्टीकरण में जनगणना कार्य में लगे होने का तर्क दिया था। इस पर विभाग ने दो-टूक कहा है कि जनगणना या अन्य गैर-शैक्षणिक कार्य स्कूल की अवधि के पहले या बाद में किए जाने चाहिए। स्कूल समय के दौरान विद्यालय में उपस्थिति अनिवार्य है।
प्रिंसिपल भी रडार पर
शिक्षा विभाग ने केवल शिक्षकों ही नहीं, बल्कि स्कूलों के प्रिंसिपलों को भी घेरे में लिया है। विभाग का मानना है कि इतनी बड़ी लापरवाही बिना प्रधानाध्यापकों की मिलीभगत या ढिलाई के संभव नहीं है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ई-शिक्षाकोष पोर्टल की अब नियमित निगरानी होगी ताकि भविष्य में इस तरह की ‘डिजिटल चोरी’ को रोका जा सके।
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