Dharm Desk – कालाष्टमी का पावन पर्व इस बार 9 मई (शनिवार) को मनाया जाएगा. जो भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित है. हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर आने वाला यह दिन साधकों और गृहस्थों दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. कहा जाता है कि इस रात की गई पूजा व्यक्ति के जीवन से भय, कर्ज, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियों को जड़ से समाप्त कर सकती है.

निशिता काल में खुलते हैं रहस्यमयी द्वार!

इस बार अष्टमी तिथि 9 मई दोपहर 2:02 बजे से शुरू होकर 10 मई दोपहर 3:06 बजे तक रहेगी. लेकिन सबसे खास समय है निशिता काल है जो 9 मई रात 11:56 बजे से 10 मई 12:38 बजे तक रहने वाला है, मान्यता है कि इसी मध्यरात्रि में काल भैरव की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है और साधना कई गुना प्रभावी हो जाती है.

कर्ज और दुखों से मुक्ति का अचूक उपाय

अगर आप लंबे समय से आर्थिक संकट, कर्ज या लगातार परेशानियों से जूझ रहे. कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को गुड़ वाली रोटी खिलाना बेहद प्रभावी उपाय माना गया है. यह छोटा सा उपाय काल भैरव को प्रसन्न करता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है.

डर और नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा

कालाष्टमी पर भैरव मंदिर जाकर सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाना और काले तिल, उड़द दाल तथा काले वस्त्रों का दान करना अत्यंत शुभ होगा है. ऐसा करने से मन का भय दूर होता है. शनि दोष के प्रभाव में भी कमी आती है.

घर में शांति और सुख का उपाय

यदि घर में लगातार क्लेश या नकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, तो इस दिन भैरव बाबा को मीठी रोटी का भोग लगाना चाहिए. यह उपाय घर के वातावरण को शुद्ध करता है और परिवार में सुख-शांति स्थापित करता है.

इन नियमों का रखें खास ध्यान

काल भैरव की पूजा करते समय सात्विकता का विशेष ध्यान रखे. मांसाहार और शराब से दूरी बनाएं. किसी का अपमान न करें और विशेष रूप से कुत्तों को कष्ट न दें, क्योंकि उन्हें भैरव का प्रिय माना जाता है. गलत आचरण करने वालों पर भैरव की कृपा नहीं होती.