JJM Scam Update: राजस्थान की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। जिस 960 करोड़ के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले ने पिछले साल गहलोत सरकार की नींद उड़ा रखी थी, उसी मामले में अब पूर्व मंत्री महेश जोशी को ACB (एसीबी) ने गिरफ्तार कर लिया है। जयपुर के गलियारों में इस खबर के बाद से ही हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों की मानें तो एसीबी की टीम पिछले कई दिनों से सबूतों की कड़ियां जोड़ रही थी और पुख्ता सबूत हाथ लगते ही यह बड़ी कार्रवाई की गई है।

सुबोध अग्रवाल के बाद अब बड़े साहब की बारी
इस घोटाले की आंच पहले ही रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल तक पहुंच चुकी थी, जिन्हें पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। लेकिन अब पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी ने यह साफ कर दिया है कि जांच की सुई काफी ऊपर तक पहुंच गई है। बता दें कि इससे पहले साल 2025 में ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने भी जोशी को इसी मामले में गिरफ्तार किया था, हालांकि बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी। मगर अब एसीबी ने नए सिरे से शिकंजा कस दिया है।
फर्जी दस्तावेजों से हड़पे थे 960 करोड़ के टेंडर
पूरे खेल को समझें तो यह जनता के पैसे की बंदरबांट का मामला है। जांच में सामने आया है कि मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल और श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनियों ने इरकॉन इंटरनेशनल के फर्जी सर्टिफिकेट लगाए। इन जाली दस्तावेजों के दम पर प्रोपराइटर महेश मित्तल और पदमचंद जैन ने करीब 960 करोड़ रुपए के टेंडर झटक लिए। सूत्रों के हवाले से खबर है कि इन फर्मों को टेंडर दिलाने और सरकारी नियमों को ताक पर रखने में तत्कालीन मंत्री महेश जोशी की सीधी मिलीभगत के सबूत मिले हैं।
किरोड़ी लाल मीणा ने दिया था धरना
इस पूरे मामले की जड़ें 20 जून 2023 से जुड़ी हैं। उस वक्त डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने जयपुर के अशोक नगर थाने के बाहर दो दिनों तक डेरा डाल दिया था। मीणा की मांग थी कि इस महाघोटाले की FIR दर्ज हो। उस धरने ने ऐसी चिंगारी सुलगाई कि विधानसभा चुनाव में भी ‘लाल डायरी’ और जेजेएम घोटाला सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया। अब एसीबी की इस कार्रवाई ने राजस्थान की राजनीति में फिर से हलचल तेज कर दी है।
15 ठिकानों पर छापेमारी और 10 गिरफ्तारियां
एसीबी की टीम ने इस मामले में पहले ही अपनी रणनीति बना ली थी। 17 फरवरी को प्रदेश भर में करीब 15 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई थी, जिसमें 10 लोगों को पहले ही दबोचा जा चुका था। अब पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी के बाद माना जा रहा है कि सचिवालय से लेकर पुराने मंत्रियों के बंगलों तक कई और चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। प्रशासन ने कोर्ट में पेशी की तैयारी पूरी कर ली है और शहर में कानून व्यवस्था को लेकर भी अलर्ट जारी है।
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