कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। राज्य परिवहन प्राधिकरण यानी STA के पुनर्गठन और दफ्तर के भोपाल ट्रांसफर किये जाने का मामला अब ग्वालियर हाइकोर्ट की डिवीजन बेंच में पहुंच गया हैं। याचिकाकर्ता ने राज्य शासन द्वारा जारी नोटिफिकेशन को नियमों के विपरीत बताया है। मामले में हाईकोर्ट ने परिवहन प्रमुख सचिव, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, परिवहन कमिश्नर सहित अन्य अफसरों को नोटिस जारी किया है।
शासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा
दरअसल यह याचिका बस ऑपरेटर हरिशंकर सिंह पटेल और देवेंद्र मोहन शर्मा ने हाईकोर्ट में दायर की है, उन्होंने 9 फरवरी 2026 के नोटिफिकेशन को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त करने की मांग इस याचिका के जरिए की है, उन्होंने याचिका के जरिए हाईकोर्ट को बताया है कि राज्य परिवहन प्राधिकरण के पुनर्गठन के दौरान परिवहन विभाग के सचिव को इसकी संरचना में शामिल किया गया है।यह प्रावधान मोटर वाहन अधिनियम के विपरीत है क्योंकि कानून के तहत सचिव की नियुक्ति और प्राधिकरण की संरचना दोनों अलग-अलग प्रक्रिया है। उन्हें साथ में नहीं मिलाया जा सकता, ऐसे में डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद शासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
पारदर्शिता पर सीधे तौर पर सवाल खड़े
बता दें की याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया है कि राज्य परिवहन प्राधिकरण के पुनर्गठन के जरिए न केवल वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी ऐसे प्रावधान जोड़ दिए गए हैं जो इसकी पारदर्शिता पर सीधे तौर पर सवाल खड़े करते हैं। इसके अलावा याचिका में यह भी दलील दी गई है कि इस बदलाव के जरिए प्राधिकरण के कामकाज को ग्वालियर से भोपाल शिफ्ट करने की कोशिश हो सकती है राज्य परिवहन प्राधिकरण का मुख्यालय वर्षों से ग्वालियर में ही रहा है जहां परिवहन आयुक्त और अपीलीय प्राधिकरण भी बैठते हैं, ऐसे में इसके भोपाल शिफ्ट होने पर प्रदेश भर के परिवहन व्यवसाईयों वकीलों और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

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