पटना। बिहार की राजनीति में ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार उनकी नाराजगी अपनी ही सरकार (NDA) के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अधीन आने वाले पुलिस प्रशासन से है। गोपालगंज पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक FIR ने अनंत सिंह को इस कदर नाराज कर दिया है कि उन्होंने सीधे पुलिस कप्तान (SP) को ही निशाने पर ले लिया।

​जनेऊ कार्यक्रम और मुजरे का विवाद

​पूरा मामला 2 और 3 अप्रैल का है, जब अनंत सिंह गोपालगंज के मीरगंज स्थित सेमराव गांव में गुड्डू राय के घर आयोजित एक जनेऊ संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस निजी कार्यक्रम में मेहमानों के मनोरंजन के लिए नाच-गाने (मुजरा) का आयोजन किया गया था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में अनंत सिंह मुजरे का आनंद लेते और तालियां बजाते नजर आए। विवाद तब बढ़ा जब कार्यक्रम में मौजूद उनके समर्थकों द्वारा खुलेआम हथियारों का प्रदर्शन किया गया।

​SP पर साधा निशाना: ‘नाम कमाने का हथकंडा’

​FIR दर्ज होने के बाद मीडिया से मुखातिब अनंत सिंह ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा, “मैं FIR से डरता हूं क्या? क्या अब मैं किसी के निमंत्रण पर जाना भी छोड़ दूं?” उन्होंने गोपालगंज के एसपी विनय तिवारी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें कोई जानता नहीं था, इसलिए चर्चा में आने और नाम कमाने के लिए उन्होंने यह कार्रवाई की है। अनंत सिंह ने साफ लहजे में कहा कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है और अगर कुछ गलत हुआ है तो उसके लिए ऊपर वाला (भगवान) बैठा है। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर नाच-गाना गलत है, तो सरकार इसे पूरी तरह बंद क्यों नहीं करवा देती?

​पुलिसिया कार्रवाई: 9 नामजद और अज्ञात पर केस

​वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। एसपी विनय तिवारी के निर्देश पर हथुआ SDPO ने मामले की गहन जांच की। जांच में पाया गया कि कार्यक्रम के दौरान न केवल अश्लील डांस हुआ, बल्कि प्रतिबंधित और लाइसेंसी हथियारों को लहराकर सार्वजनिक शांति भंग करने और इलाके में दहशत फैलाने की कोशिश की गई।
​इसके आधार पर मीरगंज थाने में कांड संख्या-247/26 के तहत FIR दर्ज की गई है। इस मामले में पुलिस ने कुल 9 लोगों को नामजद किया है, जिनमें अनंत सिंह, गायक गुंजन सिंह, आयोजक गुड्डू राय, उत्सव राय, प्रियांशु कुमार, टिशू राय, सौरव कुमार राय, विशाल राय और सुनील यादव शामिल हैं। इसके अलावा कई अज्ञात लोगों पर भी शिकंजा कसा गया है।

​हथियारों का प्रदर्शन पड़ा भारी

​पुलिस का तर्क है कि निजी समारोहों में हथियारों का प्रदर्शन कानूनन अपराध है। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे गीतों की धुन पर समर्थक असलहे लहरा रहे थे। फिलहाल, पुलिस वीडियो के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान करने और हथियारों के लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया में जुटी है। अनंत सिंह के कड़े रुख के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बिहार की सियासत और प्रशासन इस ‘बाहुबली बनाम पुलिस’ की जंग में क्या रुख अपनाता है।