सुरेश पांडेय, सिंगरौली। मध्य प्रदेश को ‘स्वर्ण प्रदेश’ बनाने के दावों के बीच ऊर्जाधानी सिंगरौली से विकास की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही है। जिले के देवसर जनपद अंतर्गत मटिया गांव में आज भी हालात किसी पिछड़े जमाने जैसे हैं। यहां करोड़ों की लागत से धामण नदी पर पुल तो बना दिया गया लेकिन उस तक पहुंचने के लिए सड़क बनाना प्रशासन भूल गया।

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एम्बुलेंस नहीं पहुंचती, खटिया ही एकमात्र सहारा

2026 के इस आधुनिक दौर में भी मटिया गांव के ग्रामीणों के लिए ‘बीमारी’ किसी अभिशाप से कम नहीं है। गांव तक पक्की सड़क न होने के कारण एम्बुलेंस यहां नहीं पहुंच पाती। मजबूरी में ग्रामीणों को बीमारों और गर्भवती महिलाओं को खटिया पर लादकर 3 किलोमीटर के कीचड़ भरे रास्ते से मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है।

4 साल से ‘शोपीस’ बना करोड़ों का पुल

ग्रामीणों का कहना है कि धामण नदी पर बना पुल पिछले 4 साल से बिना सड़क के खड़ा है। बजट खर्च हो चुका है, योजना कागजों में पूरी दिखाई जा रही है, लेकिन धरातल पर संपर्क मार्ग गायब है। ग्रामीण मिथिलेश यादव और कुल्लर प्रसाद यादव ने बताया कि बारिश के दिनों में गांव पूरी तरह से दुनिया से कट जाता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और आवश्यक सेवाओं के लिए भी उन्हें जान जोखिम में डालनी पड़ती है।

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सोशल मीडिया पर 3 साल से जारी है जंग

हैरानी की बात यह है कि इस समस्या को लेकर ग्रामीण पिछले 3 साल से सोशल मीडिया पर अभियान चला रहे हैं। कलेक्टर से लेकर सरपंच तक कई बार गुहार लगाई गई लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ।

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