Asaduddin Owaisi React On Vande Mataram: राष्ट्रगीत (national song) ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान (‘जन गण मन) के बराबर दर्जा देने पर एआईएमआईएम (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी भड़क गए हैं। मोदी सरका के इस फैसले पर हैदराबाद सांसद ने खुलकर नाराजगी जताई है। ओवैसी ने कहा कि इंडिया यानी भारत उसके लोगों से ही बनता है, राष्ट्र कोई देवी नहीं है।

बता दें कि बंगाल विधानसभा चुनवा परिणाम के बाद दुई मोदी कैबिनेट की पहली बैठक में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान (National Anthem) के समान दर्जा देने का निर्णय लिया है। सरकार ने इसके लिए ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ में संशोधन का प्रस्ताव स्वीकार किया है। ओवैसी ने ‘वंदे मातरम’ को ‘जन गण मन’ के बराबर दर्जा देने की योजना को मंजूरी मिलने पर रिएक्शन दिया है।

असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि- वंदे मातरम एक देवी की स्तुति है। इसे राष्ट्रगान के बराबर नहीं माना जा सकता। जन गण मन भारत और उसके लोगों का जश्न मनाता है, किसी खास धर्म का नहीं। धर्म ≠ राष्ट्र। जिस आदमी ने वंदे मातरम लिखा था, वह ब्रिटिश राज का हमदर्द था और मुसलमानों से नफ़रत करता था। नेताजी बोस, गांधी, नेहरू और टैगोर, सभी ने इसे मना कर दिया था। भारत के संविधान की प्रस्तावना “हम, लोग” से शुरू होती है — “भारत माँ” से नहीं। यह “सोचने, बोलने, विश्वास, आस्था और पूजा की आज़ादी” का वादा करती है। संविधान का सबसे पहला नियम, आर्टिकल 1, “इंडिया, दैट इज़ भारत” को राज्यों का एक यूनियन बताता है।

ये देश किसी देवी या देवता की संपत्ति नहीं

एआईएमआईएम चीफ ने आगे लिखा कि- संविधान सभा में कुछ सदस्य चाहते थे कि प्रस्तावना किसी देवी के नाम से शुरू हो; उन्होंने खास तौर पर वंदे मातरम का ज़िक्र किया। दूसरे चाहते थे कि यह “ईश्वर के नाम पर” से शुरू हो और “अपने नागरिकों” की जगह “उसके नागरिक” रखे। ये सभी संशोधन खारिज हो गए। अंत में ओवैसी ने आगे लिखा कि- इंडिया, यानी भारत, इसके लोग हैं। देश कोई देवी नहीं है; यह किसी देवी-देवता के नाम पर नहीं चलता, और यह किसी एक देवी-देवता का नहीं है।

बंगाल चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद मोदी सरकार का फैसला

दरअसल पश्चिम बंगाल में प्रचंड जीत के बाद PM नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 5 मई हुई मोदी कैबिनेट की पहली बैठक में ऐतिहासिक फैसला लेते हुए राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सरकार ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ में संशोधन का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।संशोधन लागू होने पर बंकिम चंद्र चटर्जी रचित ‘वंदे मातरम’ पर वही नियम और प्रतिबंध लागू होंगे जो अभी राष्ट्रगान के लिए हैं. इसका उल्लंघन संज्ञेय अपराध माना जाएगा।

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