कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। कहीं कोई महिला अकेली थी… कहीं किसी घर में डर चुपचाप बैठा था… और इसी बीच हरियाणा में एक ऐसा सिस्टम खामोशी से काम कर रहा था, जिसकी भनक अपराधियों को भी देर से लगी। दावा है कि हजारों महिलाओं की सुरक्षा अब सिर्फ शिकायत आने के बाद नहीं, बल्कि पहले से निगरानी और संवेदनशील प्रतिक्रिया के जरिए सुनिश्चित की जा रही है।

हरियाणा पुलिस की ओर से साझा किए गए आंकड़ों ने अचानक सबका ध्यान खींच लिया। बताया गया कि 94 हजार महिलाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग की गई, जबकि 98 प्रतिशत मामलों का समाधान भी किया गया। सबसे बड़ा दावा यह रहा कि महिलाओं से जुड़े अपराधों में 38 प्रतिशत तक कमी दर्ज हुई है।

डीजीपी अजय सिंघल के नेतृत्व में पुलिस ने “दुर्गा शक्ति” जैसी पहल, डेटा आधारित गश्त और संवेदनशील पुलिसिंग मॉडल को इस बदलाव की वजह बताया है। पुलिस का कहना है कि अब केवल बल प्रयोग नहीं, बल्कि भरोसा, त्वरित प्रतिक्रिया और तकनीकी निगरानी सुरक्षा का नया आधार बन रहे हैं।

हरियाणा पुलिस ने अपने संदेश में कहा कि “सुरक्षा केवल व्यवस्था नहीं, समाज की अंतरात्मा है।” इसी सोच के साथ महिलाओं की सुरक्षा को लेकर नई रणनीति पर लगातार काम किया जा रहा है, ताकि डर की जगह विश्वास पैदा हो और अपराधियों में कानून का भय बना रहे।