Rajasthan News: गले सूख रहे हैं और सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका है। नवलगढ़ के तपते हुए रास्तों पर जब महिलाओं का गुस्सा फूटता है, तो बड़े-बड़े ओहदे फीके पड़ जाते हैं। झुंझुनूं की ढाणियां पंचायत में जो हुआ, वह महज़ एक वीडियो नहीं है। यह उन प्यासे कंठों की चीख है जो महीनों से बूंद-बूंद को तरस रहे हैं।

सरकारी गाड़ी और प्यास का गुस्सा
कल शाम जब जेईएन अंतरा मीणा अपनी गाड़ी से मुआयना करने पहुंचीं, तो उन्हें अंदाज़ा भी नहीं होगा कि हालात इतने खराब हैं। जैसे ही उनकी गाड़ी रुकी, गुस्साई महिलाओं ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। यह घेराव किसी नेता का नहीं, बल्कि एक उस सिस्टम का था जो महीनों से सो रहा है। महिलाओं के तेवर इतने तीखे थे कि जेईएन साहिबा अपनी गाड़ी से बाहर तक नहीं निकल पाईं। यह वाकई डराने वाला मंजर था।
जमीन पर खड़े होकर देखिए तो समझ आता है कि जब घर में पीने का पानी न हो और बच्चे प्यास से बिलख रहे हों, तो इंसान शिष्टाचार भूल जाता है। गांव में दो-दो ट्यूबवेल होने के बाद भी अगर सिर्फ दो मिनट सप्लाई मिले, तो गुस्सा आना लाजिमी है।
तनाव इतना बढ़ गया कि महिलाओं की बातें सुनते हुए जेईएन अंतरा मीणा की आंखों से आंसू छलक पड़े। वे फूट-फूटकर रोने लगीं। एक सरकारी अधिकारी को इस तरह टूटते देख वहां सन्नाटा तो पसरा, लेकिन गांव की एक महिला ने कहा, मैडम, आप तो आज रोई हैं, हम तो महीनों से रो रहे हैं।
मौके पर पहुंचे भाजपा नेता राजेश कटेवा ने भी विभागीय लापरवाही को आड़े हाथों लिया। उनका कहना है कि 500 परिवार इस संकट से जूझ रहे हैं और अधिकारी सिर्फ कागजों पर ही विकास की बात कर रहे हैं। वहीं जेईएन का कहना था कि वे वहां कर्मचारियों की बाइक की चाबी छीने जाने की शिकायत पर आई थीं।
वजह जो भी हो, पर तस्वीर साफ है। जब तक नलों में पानी नहीं आएगा, ये गुस्सा शांत होने वाला नहीं है। आज एक अधिकारी रोई है, कल शायद पूरा महकमा सड़क पर होगा अगर वक्त रहते प्यास नहीं बुझाई गई।
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