NEET परीक्षा पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर और देश के विभिन्न हिस्सों में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया कि कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से जरूरी है। अदालत ने कहा कि जहां पुलिस की कथित ज्यादती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, वहीं प्रदर्शन की आड़ में हिंसा या आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों को भी कोई राहत नहीं मिलेगी।

CJI सूर्यकांत की दोटूक टिप्पणी

सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि यह धारणा नहीं बननी चाहिए कि पुलिस द्वारा की गई किसी भी तरह की ज्यादती को नजरअंदाज किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी पुलिस अधिकारी ने अधिकारों का दुरुपयोग किया है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बीच शामिल आपराधिक तत्वों को अदालत से राहत मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

सरकार का पक्ष: छात्रों पर कार्रवाई नहीं चाहते

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया कि सरकार का उद्देश्य छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे ताकि निर्दोष छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

तुषार मेहता ने यह भी बताया कि सरकार ने याचिकाकर्ताओं से बातचीत की है और छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान ऐसे लोग भी शामिल थे जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। ऐसे व्यक्तियों को किसी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती।

क्या है मामला?

NEET परीक्षा पेपर लीक के विरोध में देशभर में छात्रों ने प्रदर्शन किए थे। दिल्ली के जंतर-मंतर समेत कई स्थानों पर हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। अब अदालत ने साफ कर दिया है कि छात्रों के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी समान रूप से आवश्यक है।

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