पंचकूला जिला अदालत ने कांग्रेस नेता चंद्रमोहन द्वारा दायर मानहानि मामले में भाजपा सांसद रेखा शर्मा को भविष्य में आपत्तिजनक बयानबाजी से बचने के निर्देश दिए हैं।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। पंचकूला नगर निगम चुनाव 2026 के बीच राजनीतिक बयानबाजी अब अदालत तक पहुंच गई है। भाजपा की राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा की मुश्किलें उस समय बढ़ती नजर आईं, जब पंचकूला जिला अदालत ने उनके खिलाफ दायर मानहानि मामले में सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट चेतावनी जारी कर दी। अदालत ने कहा कि वह पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भजनलाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन के खिलाफ किसी भी प्रकार की अभद्र या अमर्यादित टिप्पणी नहीं कर सकतीं।

यह मामला पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता चंद्रमोहन द्वारा दायर सिविल वाद से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया कि 24 अप्रैल 2026 को पंचकूला नगर निगम चुनाव प्रचार के दौरान रेखा शर्मा ने सार्वजनिक मंच से चंद्रमोहन और उनके दिवंगत पिता चौधरी भजनलाल को लेकर गंभीर और आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। दावा किया गया कि ये बयान बाद में मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर व्यापक रूप से प्रसारित हुए, जिससे उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा।

मामले की सुनवाई करते हुए पंचकूला की सिविल न्यायाधीश अरुणिमा चौहान ने प्रतिवादी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने राजनीतिक मर्यादा और सार्वजनिक बयानबाजी को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान ऐसे बयान, जो प्रथम दृष्टया मानहानिकारक प्रतीत होते हों, उनसे बचा जाना चाहिए। अदालत ने अंतरिम स्तर पर रेखा शर्मा को भविष्य में इस प्रकार की कथित मानहानिकारक टिप्पणियां करने से परहेज करने के निर्देश दिए।

वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता दीपांशु बंसल ने अदालत में दलील दी कि प्रतिवादी द्वारा दिए गए बयान लापरवाह और सार्वजनिक गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले थे। उन्होंने कई न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए अदालत से मांग की कि ऐसी टिप्पणियों पर तत्काल रोक लगाई जाए और उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। याचिका में यह भी कहा गया कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के नाम पर व्यक्तिगत और पारिवारिक गरिमा को निशाना बनाना लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ है।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त तय की है, जिसमें रेखा शर्मा को अपना जवाब दाखिल करना होगा। राजनीतिक गलियारों में अदालत की इस सख्ती को भाजपा सांसद के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, वहीं कांग्रेस खेमे में इसे नैतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।