० गुरु-शिष्य परंपरा प्रशिक्षण योजना के तहत कलाकारों से मांगे आवेदन

सोनू वर्मा , नूंह। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज द्वारा गुरु-शिष्य परंपरा प्रशिक्षण योजना 2026-27 के तहत देश की लुप्तप्राय लोक कलाओं और पारंपरिक विधाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विशेष पहल की गई है। इस संबंध में जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी (डीआईपीआरओ) सुरेंद्र बजाड़ ने जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और युवा पीढ़ी को पारंपरिक कला विधाओं से जोड़ना है।


उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत ऐसे अनुभवी गुरु, जो दुर्लभ एवं पारंपरिक कलाओं का प्रशिक्षण दे रहे हैं, उनसे तथा उनके शिष्यों से संबंधित विवरण जैसे नाम, पता, मोबाइल नंबर एवं अन्य आवश्यक जानकारी 11 मई को दोपहर 3 बजे तक जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी कार्यालय में जमा करवाई जानी है।


डीआईपीआरओ ने बताया कि चयनित गुरु, संगतकार एवं शिष्यों को योजना के तहत मासिक छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। इसके तहत गुरु को ₹7,500 प्रतिमाह, संगतकार को ₹3,750 प्रतिमाह तथा प्रत्येक शिष्य को ₹1,500 प्रतिमाह की सहायता राशि दी जाएगी।


पात्रता शर्तें
0 इस योजना के लिए आवेदन करने वाले कलाकार की आयु 50 वर्ष से कम होनी चाहिए तथा संबंधित कला क्षेत्र में कम से कम 20 वर्षों का अनुभव अनिवार्य है। आवेदक को अपना बायोडाटा, नवीनतम फोटो, प्रमाण पत्रों की स्वयं सत्यापित प्रतियां तथा यदि उपलब्ध हों तो सरकारी या मान्यता प्राप्त संस्थानों से प्राप्त पुरस्कारों के प्रमाण पत्र भी संलग्न करने होंगे।


0 योजना के अनुसार एक गुरु के साथ चार शिष्य निर्धारित किए गए हैं, जबकि लोक नृत्यों के क्षेत्र में अधिकतम आठ शिष्यों को प्रशिक्षण की अनुमति होगी। जिन विधाओं में संगतकार की आवश्यकता होगी, वहां एक या दो संगतकार रखे जा सकते हैं।
यह योजना मुख्य रूप से लोक गायन, लोकगाथा, लोक चित्रकला, दुर्लभ वाद्य यंत्रों एवं लोक नृत्यों जैसी पारंपरिक विधाओं पर लागू होगी।


डीआईपीआरओ सुरेंद्र बजाड़ ने जिले के सभी लोक कलाकारों, गुरुओं एवं सांस्कृतिक संस्थानों से अपील की है कि वे आगे आकर लुप्त हो रही कलाओं के संरक्षण में योगदान दें और पात्र कलाकारों के आवेदन समय पर जमा करवाएं, ताकि उन्हें इस योजना का लाभ मिल सके।