Bastar News Update : कोंडागांव. राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर केशकाल घाट में जाम की समस्या फिर सामने आई है. गुरुवार-शुक्रवार की रात सैकड़ों वाहन घंटों तक फंसे रहे. संकरी सड़क और भारी वाहनों की आवाजाही मुख्य वजह बनी. रात करीब 1 बजे हालात बिगड़े और दोनों ओर लंबी कतार लग गई. यात्री घंटों गाड़ियों में फंसे रहे और भारी परेशानी झेलनी पड़ी. स्थानीय लोग इसे रोजमर्रा की समस्या बता रहे हैं. खासकर रात में बड़े वाहनों से स्थिति और गंभीर हो जाती है. मोड़ों पर ट्रैफिक मैनेजमेंट की कमी साफ नजर आती है. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर यातायात बहाल किया. लेकिन यह राहत अस्थायी साबित हो रही है. लोगों ने स्थायी ट्रैफिक प्लान की मांग उठाई है. यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो समस्या और विकराल हो सकती है.
जंगल से जज्बा, छिंद के बीजों से तैयार ‘फ्यूचर कॉफी’
दंतेवाड़ा. बस्तर के जंगलों में बेकार समझे जाने वाले छिंद के बीज अब वैश्विक पहचान की ओर बढ़ रहे हैं. दंतेवाड़ा के युवा उद्यमी विशाल हालदार ने इसे ‘हर्बल कॉफी’ में बदलकर नई मिसाल पेश की है. दो साल के शोध के बाद तैयार यह कॉफी पूरी तरह कैफीन मुक्त है. बीकॉम और सॉफ्टवेयर की पढ़ाई करने वाले विशाल ने तकनीक और परंपरा को जोड़ा है. यह कॉफी एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है और सेहत के लिहाज से बेहतर विकल्प मानी जा रही है. इनोवेशन महाकुंभ में इसे पहला स्थान मिला और मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया. विशेषज्ञों ने भी इस उत्पाद की गुणवत्ता की सराहना की है. छिंद के बीजों में कई पोषक तत्व और औषधीय गुण मौजूद हैं. विशाल इसे स्थानीय रोजगार से जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं. ग्रामीणों को बीज संग्रहण के जरिए आय का नया स्रोत मिल सकता है. यह पहल ‘लोकल टू ग्लोबल’ मॉडल की मजबूत नींव रख रही है. बस्तर का यह प्रयोग अब स्टार्टअप की नई पहचान बनता दिख रहा है.
हाई-लेवल बैठक से उम्मीद क्या सुलझेंगे पुराने विवाद?
बस्तर. बस्तर में 19 मई को होने वाली उच्चस्तरीय बैठक को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इस अहम बैठक की अध्यक्षता करेंगे. नक्सल प्रभाव कम होने के बाद यह पहली बड़ी रणनीतिक बैठक है. लोग चाहते हैं कि ओडिशा और आंध्रप्रदेश के सीएम भी शामिल हों. इंद्रावती जल विवाद और पोलावरम जैसे मुद्दे अब भी लंबित हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि बिना अंतरराज्यीय सहमति समाधान मुश्किल है. करीब 45 साल पुराने समझौते के बावजूद जल बंटवारा अटका हुआ है. वहीं पोलावरम परियोजना से सुकमा के हजारों लोग प्रभावित हैं. स्थानीय नागरिक इस बैठक को निर्णायक मान रहे हैं. डबल इंजन सरकार से न्याय की उम्मीद जताई जा रही है. अगर सीमावर्ती राज्य शामिल हुए तो ठोस नतीजे निकल सकते हैं. बस्तर के विकास का रोडमैप इसी बैठक से तय होने की उम्मीद है.
वट सावित्री व्रत, इस बार योगों का दुर्लभ संयोग
जगदलपुर. 16 मई को वट सावित्री व्रत विशेष संयोगों के साथ मनाया जाएगा. इस दिन शनि जयंती सहित कई शुभ योग एक साथ बन रहे हैं. गजलक्ष्मी, बुधादित्य और विपरीत राजयोग इसकी महत्ता बढ़ा रहे हैं. व्रत का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:07 से शुरू होगा. पूजा के लिए सुबह और दोपहर दोनों समय शुभ माने गए हैं. सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर परिक्रमा करेंगी. धार्मिक मान्यता के अनुसार इसमें त्रिदेव का वास होता है. सावित्री-सत्यवान की कथा इस व्रत से जुड़ी है. यह व्रत पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य का प्रतीक है. अमावस्या तिथि सुबह 5:11 बजे से प्रारंभ होगी. स्नान-दान का भी इस दिन विशेष महत्व बताया गया है. इस बार के संयोग इसे और अधिक फलदायी बना रहे हैं.
पुल से बदली तस्वीर सुरक्षा और विकास साथ-साथ
नारायणपुर. अबूझमाड़ के दुर्गम इलाके में आईटीबीपी ने मिसाल पेश की है. कुड़मेल गांव के पास 60 मीटर लंबा लकड़ी-बांस का पुल बनाया गया. यह क्षेत्र ओरछा थाना से करीब 20 किमी दूर स्थित है. स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से यह निर्माण संभव हुआ. 15 जवानों ने 15 दिनों में चुनौतीपूर्ण कार्य पूरा किया. पुल का लोकार्पण वरिष्ठ अधिकारियों ने किया. अब सालभर गांव का संपर्क सुरक्षित बना रहेगा. यह पुल पैदल ही नहीं, बाइक के लिए भी उपयोगी है. बारिश में कटने वाला संपर्क अब नहीं टूटेगा. सुरक्षा बल और ग्रामीणों का तालमेल मजबूत हुआ है. यह पहल जनसेवा और विश्वास का प्रतीक बन गई है. अबूझमाड़ में विकास की नई राह खुलती नजर आ रही है.
आंधी-तूफान ने तोड़ी उम्मीद मक्के की फसल तबाह
कोंडागांव. बड़ेराजपुर ब्लॉक के डोंगरीपारा में किसानों को बड़ा झटका लगा है. तेज आंधी और बारिश ने मक्के की फसल को जमीन पर गिरा दिया. कटाई से पहले ही पूरी मेहनत बर्बाद हो गई. किसानों ने इस बार खेती में अच्छी लागत लगाई थी. अचानक बदले मौसम ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. धनसिंह मरकाम सहित कई किसान प्रभावित हुए हैं. पहले से सिंचाई की कमी से फसल कमजोर थी. तूफान ने स्थिति और गंभीर बना दी. कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी. अब कर्ज चुकाना भी मुश्किल हो सकता है. प्रशासन से सर्वे और मुआवजे की मांग उठी है. मौसम की अनिश्चितता खेती के लिए बड़ा खतरा बन रही है.

जल जीवन मिशन पर सवाल, जमीन पर अधूरा काम
बस्तर. कविआसना पंचायत में जल जीवन मिशन पर सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि काम अधूरा छोड़ दिया गया है. पानी टंकी बनी, लेकिन उसमें पानी ही नहीं है. घरों तक नल कनेक्शन भी पूरी तरह नहीं पहुंचे. पुरानी योजना के सहारे ही पानी की आपूर्ति हो रही है. रिकॉर्ड में काम पूरा दिखाया जा रहा है. ग्रामीणों ने गुणवत्ता और वित्तीय जांच की मांग की है. ठेकेदार पर कार्रवाई की बात कही जा रही है. निर्माण सामग्री और समयसीमा पर भी सवाल हैं. लोगों की उम्मीदें अब निराशा में बदल रही हैं. प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है. योजना की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी.
जहां लगती थी जन-अदालत, वहां लगा समाधान शिविर
बीजापुर. पुजारी कांकेर में प्रशासन ने ऐतिहासिक शिविर आयोजित किया. यह वही क्षेत्र है जहां कभी जन-अदालत लगती थी.
पहली बार सभी विभाग एक साथ गांव पहुंचे. ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर शिविर में हिस्सा लिया. स्थानीय भाषा में योजनाओं की जानकारी दी गई. कई लोगों ने मौके पर ही आवेदन किया. 29 मामलों का तुरंत निराकरण भी किया गया. महिलाएं, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में पहुंचे. प्रशासन और जनता के बीच विश्वास बढ़ा है. जनप्रतिनिधियों ने इसे बदलाव की तस्वीर बताया. अब ग्रामीण खुलकर अपनी समस्याएं रख रहे हैं. यह पहल सुशासन की नई दिशा दिखा रही है.
आधा एकड़ से आत्मनिर्भरता, तुलसा की बदली तकदीर
बस्तर. कलचा गांव की तुलसा बघेल आज मिसाल बन चुकी हैं. कभी संसाधनों की कमी से जूझने वाली तुलसा अब सफल किसान हैं. स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने नई शुरुआत की. 7 हजार के छोटे कर्ज से बाड़ी विकास शुरू किया. मचान और लाइन पद्धति जैसी तकनीक अपनाई. आज वे पत्ता गोभी, मटर और भिंडी की खेती कर रही हैं. आमदनी बढ़ने पर उन्होंने बोरवेल भी स्थापित कराया. अब सालभर खेती संभव हो पाई है. कमाई से उन्होंने घर पक्का किया और परिवार संवार रही हैं.
आने वाले समय में मुर्गी पालन की योजना है. तुलसा की कहानी आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई है. यह बदलाव सरकारी योजनाओं और मेहनत का परिणाम है.
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