Rajasthan News: सरकारी अस्पतालों के हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। कोटा का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि अब राजस्थान के दौसा जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां रामकरण जोशी जिला अस्पताल में एक 9 महीने की गर्भवती महिला की प्रसव से पहले ही मौत हो गई। महिला की मौत के बाद अस्पताल में चीख-पुकार मच गई और गुस्साए परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का बड़ा आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया।

मेरी पत्नी तड़पती रही और वो बोलते रहे सब ठीक है

मृतका के पति की बातें सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। पति ने बताया कि उसने अपनी पत्नी को 7 मई को अस्पताल में भर्ती कराया था। उसे लगातार ड्रिप चढ़ाई जा रही थी। शुक्रवार की शाम को जब उसकी हालत बिगड़ने लगी, तो परिवार वाले हाथ-पैर जोड़ते रहे कि इसे कहीं और रेफर कर दो। लेकिन डॉक्टरों ने एक न सुनी। वो बस यही दिलासा देते रहे कि घबराने की बात नहीं है, सब नॉर्मल है।

एक इंजेक्शन और फिर सब खत्म

परिजनों का सबसे संगीन आरोप एक इंजेक्शन को लेकर है। पति का कहना है कि नर्स या डॉक्टर ने जैसे ही उसकी पत्नी को एक इंजेक्शन लगाया, उसके तुरंत बाद महिला के मुंह से झाग निकलने लगा। उसकी आंखों से आंसू गिरने लगे और शरीर बेदम हो गया। जब तक डॉक्टर उसे रेफर करते और उसे दूसरे अस्पताल ले जाया जाता, महिला ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। अस्पताल की चौखट पर एक मां और उसके अजन्मे बच्चे की कहानी खत्म हो गई।

अस्पताल ने दी सफाई- उसे तो दौरा पड़ा था

इधर, अस्पताल प्रशासन अपनी साख बचाने में जुटा है। मातृ एवं शिशु इकाई के इंचार्ज डॉ. रविंद्र शर्मा का कहना है कि महिला को खून की कमी (एनीमिया) थी। उसे ब्लड भी चढ़ाया गया था। डॉक्टरों के मुताबिक, शायद उसे अचानक दौरा पड़ा या फिर उल्टी उसकी सांस की नली में फंस गई, जिससे उसकी जान चली गई। उन्होंने साफ कहा कि इलाज में कोई ढिलाई नहीं बरती गई थी।

गुस्साए परिजन पोस्टमार्टम कराने को तैयार नहीं थे। माहौल इतना बिगड़ गया कि पुलिस को दखल देना पड़ा। डीएसपी धर्मेंद्र शर्मा ने टीम के साथ मिलकर परिजनों को घंटों समझाया, जिसके बाद वे राजी हुए। अब मेडिकल बोर्ड के जरिए पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि मौत की असली वजह क्या थी।

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