कोलकाता के बिग्रेड परेड ग्राउंड में आज सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। सुवेंदु के अलावा 5 अन्य नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। इस बीच नतीजे सामने आने के बाद ममता बनर्जी पहली बार जनता से मुखातिब हुईं। उन्होंने शनिवार को नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किया।

Mamata Banerjee ने रवींद्र जयंती के अवसर पर Rabindranath Tagore को श्रद्धांजलि देते हुए उनके विचारों को मानवता, एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए पोस्ट में ममता बनर्जी ने कहा कि टैगोर का दर्शन बांग्ला भाषा, संस्कृति और विरासत के पुनर्जन्म का प्रतीक है तथा उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का काम कर रहे हैं।

उन्होंने लिखा, “उनका गहन जीवन-दर्शन हमारी दैनिक यात्रा के लिए सदैव मार्गदर्शक प्रकाश बना हुआ है। उन्होंने हमें सिखाया कि विभाजन सत्य नहीं है, सत्य तो एकता है।” टीएमसी प्रमुख ने कहा कि गुरुदेव टैगोर केवल एक महान कवि ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को मानव एकता का संदेश देने वाले महामानव थे। उन्होंने कहा कि टैगोर ने उग्र राष्ट्रवाद की सीमाओं से ऊपर उठकर विश्व बंधुत्व और मानवता की भावना को बढ़ावा दिया।

कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिलने का आरोप

इस मौके पर ममता बनर्जी ने बीजेपी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि रवींद्र जयंती से जुड़े कार्यक्रमों के लिए तीन अलग-अलग स्थानों पर अनुमति मांगी गई थी, लेकिन प्रशासन ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपने आवास पर ही कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला लिया।

ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि आयोजन की तैयारियों में लगे डेकोरेटर्स को सहयोग करने से रोका गया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर इस तरह की रोक उचित नहीं है। टीएमसी सुप्रीमो ने समान विचारधारा वाले दलों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि बीजेपी को रोकने के लिए विपक्षी दलों को साथ आना होगा।

टैगोर के संदेश को बताया आज भी प्रासंगिक

ममता बनर्जी ने अपने संदेश में कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर के विचार आज भी लोगों को जोड़ने और समाज में सौहार्द कायम करने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने टैगोर की रचनाओं का उल्लेख करते हुए लिखा, “हे मेरे हृदय, इस पुण्य तीर्थ में, भारत के इस महापुरुष के सागर तट पर धीरे-धीरे जागृत हो।” उन्होंने कहा कि टैगोर की शिक्षाएं वर्तमान समय में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जब समाज को विभाजन नहीं बल्कि एकता और मानवता की आवश्यकता है।

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