आशुतोष तिवारी, बस्तर। जिले में एक महिला को लोन दिलाने का झांसा देकर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। अनजान नंबर से आए कॉल के बाद महिला को एक ऐप डाउनलोड कराया गया और इसके बाद उससे रकम भी वसूली गई। मामला सामने आने के बाद पुलिस की साइबर जांच में कॉल करने वाले नंबर का कनेक्शन पाकिस्तान से जुड़ा बताया जा रहा है।

हालांकि, इस नंबर के आधार पर किसी बड़े संगठित नेटवर्क या पाकिस्तान में बैठे साइबर ठगों की संलिप्तता की पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस मामले की आगे की कड़ियां खंगाल रही है।

लोन दिलाने का झांसा देकर शुरू हुई ठगी

जानकारी के मुताबिक पीड़ित महिला के पास एक अनजान नंबर से फोन आया था। कॉल करने वाले ने उसे लोन उपलब्ध कराने की बात कही। इसके बाद प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर महिला को एक ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा गया। ऐप डाउनलोड कराने के बाद उससे कुछ रकम भी वसूली गई।

रकम भले ही एक-दो हजार रुपये के आसपास रही हो, लेकिन पुलिस के लिए मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए नंबर की अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जानकारी सामने आई है।

पाकिस्तानी नंबर से जुड़ा बताया जा रहा कॉल

साइबर जांच के दौरान पुलिस को जिस नंबर से महिला के पास कॉल आया था, उसके पाकिस्तान से जुड़े होने की जानकारी मिली है। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि नंबर के पीछे वास्तव में कौन लोग हैं और क्या इस मामले के तार भारत के दूसरे हिस्सों से भी जुड़े हुए हैं।

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं इसी तरीके से दूसरे लोगों को भी निशाना तो नहीं बनाया गया। फिलहाल पाकिस्तान कनेक्शन और किसी संगठित साइबर नेटवर्क के बीच संबंध की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

छोटी रकम के जरिए बड़े नेटवर्क का शक?

इस मामले में करीब एक-दो हजार रुपये की रकम सामने आने के बावजूद जांच एजेंसियों की नजर इसके तरीके और इस्तेमाल किए गए नंबर पर है। चर्चा इस बात को लेकर भी है कि क्या छोटी-छोटी रकम के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को निशाना बनाने वाला कोई नेटवर्क सक्रिय है।

भारत के 1000 रुपये के बदले पाकिस्तानी मुद्रा में करीब 2,897 रुपये होने का जिक्र भी इस मामले में सामने आया है। हालांकि, सिर्फ इस मुद्रा रूपांतरण या रकम के आधार पर किसी संगठित नेटवर्क की मौजूदगी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। पुलिस की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि इस घटना का किसी बड़े साइबर गिरोह से कोई संबंध है या नहीं।

संदिग्ध नंबर ब्लॉक कराने भेजे, NCRP पर भी रिपोर्ट

पुलिस ने मामले में सामने आए संबंधित नंबरों को ब्लॉक कराने के लिए भेज दिया है। साथ ही इसकी जानकारी National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) पर भी रिपोर्ट की गई है। साइबर अपराध से जुड़े संदिग्ध मोबाइल नंबर, वेबसाइट, ऐप या अन्य माध्यमों की रिपोर्टिंग के लिए NCRP पर सुविधा उपलब्ध है।

पुलिस की अपील- अनजान ऐप और लिंक से रहें सावधान

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अनजान नंबर से आने वाले लोन, निवेश, पैसे दोगुने करने या किसी सरकारी योजना से जुड़े कॉल पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में ऐप डाउनलोड करने या लिंक खोलने से भी बचें।

यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो उसे तुरंत 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत करनी चाहिए। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के मुताबिक 1930 पर ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्ट की जा सकती है।

साइबर ठगी से बचने का आसान तरीका है- अनजान कॉल पर भरोसा न करें, संदिग्ध ऐप या लिंक डाउनलोड न करें और बैंकिंग या निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।

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