आकाश श्रीवास्तव, नीमच। मध्यप्रदेश के नीमच जिले के जावद में कुंवारों के देवता के रूप में प्रसिद्ध बिल्लम बावजी का अनोखा दरबार हर साल आज ही के दिन रंग पंचमी को लगता है जो रंग तेरस तक चलता है, जहां विवाह की मनोकामना लेकर हजारों अविवाहित युवक-युवतियां और उनके परिजन पहुंचते हैं। करीब 30 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के अनुसार बावजी की प्रतिमा को गणेश मंदिर की कुई से लाकर जावद के पुरानी धान मंडी क्षेत्र में स्थापित किया जाता है, जहां नौ दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना और मन्नतों का दौर चलता है।
चढ़ाया हुआ पान खाना होता है
मान्यता है कि यहां पान और नारियल अर्पित कर अर्जी लगाने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर हो जाती हैं और जल्द ही योग्य जीवनसाथी मिल जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार जिस युवक या युवती की शादी की अर्जी लगाई जाती है उसे चढ़ाया हुआ पान खाना होता है, जिसके बाद शीघ्र ही विवाह का रिश्ता तय होने की बात कही जाती है। कई श्रद्धालुओं ने बावजी की कृपा से मनोकामना पूरी होने के उदाहरण भी साझा किए हैं।
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सफाई के दौरान यह प्रतिमा निकली थी
बताया जाता है कि करीब 30 वर्ष पहले गणेश मंदिर की कुई की सफाई के दौरान यह प्रतिमा निकली थी, जिसके बाद इसे कुई के थारे पर विराजित कर दिया गया और धीरे-धीरे इसकी ख्याति कुंवारों के देवता के रूप में फैलने लगी। आज यह अनोखा दरबार लोगों की आस्था का केंद्र बन चुका है,जहाँ पर देश के कोने-कोने से हर साल हजारों युवक-युवतियां अपने जीवनसाथी की कामना लेकर पहुंचते हैं और बावजी के दरबार में माथा टेकते हैं।
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