Abhijeet Dipke Attack On CEC Gyanesh Kumar Over SIR: वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग में मतभेद पर इंडियन एक्सप्रेस की खुलासे के बाद बवाल मच गया है। पूरा विपक्ष इसे लेकर मोदी सरकार और सीईसी ज्ञानेश कुमार पर निशाना साध रही है। इसी बीच कांग्रेस जनता पार्टी यानी सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके चुनाव आयोग (election Commission) पर भड़कते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भारत का दुश्मन करार दिया।
अभिजीत दीपके ने S.I.R को Special Intensive Rigging (स्पेशल इंटेंसिव हेराफेकी) कहा। दीपके ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- ज्ञानेश कुमार भारत के दुश्मन हैं। खबर है कि वोटर लिस्ट से 12 करोड़ से ज़्यादा नाम हटा दिए गए हैं। यह 2024 के लोकसभा चुनाव के आस-पास 97 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर्स का लगभग 12.4% है। BJP की लीडरशिप वाली NDA और विपक्ष के बीच सिर्फ़ 2% का गैप था। ज्ञानेश कुमार चुनाव नहीं करा रहे हैं, बल्कि उन्हें लिख रहे हैं।
सीजेपी नेता दीपके ने आगे कहा कि बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA और विपक्ष के बीच का अंतर सिर्फ 2 फीसदी था. मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार चुनाव करवा नहीं रहे हैं, बल्कि वे चुनाव की स्क्रिप्ट लिख रहे हैं. इसके अलावा एक अन्य पोस्ट में अभजीत दीपके ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को Special Intensive Rigging (विशेष गहन हेराफेरी) करार दिया है. इससे पहले सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने भी ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब इस देश का इतिहास लिखा जाएगा, तो लोकतंत्र को बर्बाद करने में शामिल लोगों की लिस्ट में ज्ञानेश कुमार काफी ऊपर होंगे। एसआईआर प्रक्रिया के मामले को लेकर अब पूरा विपक्ष चुनाव आयोग पर हमलावर है।
इंडियन एक्सप्रेस ने खुलासा किया है कि दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू (Sukhbir Singh Sandhu) और विवेक जोशी (Vivek Joshi ) ने नए वोटरों को जोड़ने और नाम हटाने से लेकर जानकारी छिपाने पर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों के बिना जानकारी दिए मुख्य चुमनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फैसले लिए। दोनों चुनाव आयुक्त ने 10 महीने में 14 बार शिकायत की है। शिकायत में सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी SIR, फॉर्म 6 में बदलाव, नए वोटर का रजिस्ट्रेशन, वोटर लिस्ट से नाम हटाना और जोड़ना, नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ अपील, वोटर लिस्ट की सुरक्षा और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर नाराजगी जताई है।
चुनाव आयुक्त लिखित शिकायत दी
एक लिखित शिकायत में संधू ने कहा है कि EC ने दो कमिश्नरों की लिखित सलाह के खिलाफ काम किया और दावा किया कि उनका यह कदम “बिना अधिकार के और गैर-कानूनी” था। हाल ही में, आम तौर पर अपनाए जाने वाले तरीकों से हटकर, जोशी और संधू ने अलग-अलग कैबिनेट सेक्रेटरी को काम के बंटवारे में हुए बदलावों के बारे में शिकायत की। इन बदलावों से असल में वोटर लिस्ट के लिए IT सिस्टम की निगरानी का एक स्तर खत्म हो गया था। उन्होंने साफ कहा कि ये बदलाव उनकी जानकारी के बिना किए गए थे। उन्होंने इन्हें रद्द कर दिया।
तीन चुनाव आयुक्तों का पैनल है चुनाव आयोग
बता दें कि चुनाव आयोग के बड़े फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ, दो अन्य चुनाव आयुक्तों का पैनल लेता है। इनमें से दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एपआईआर में लिए फैसले पर आपत्तियां जताई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं। एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कई मसलों पर दो चुनाव आयुक्तों ने अपनी आपत्तियां जताई. उन्होंने 10 महीनों में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराईं। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नए वोटरों को जोड़ने और नाम हटाने से लेकर जानकारी छिपाने पर सवाल उठाए हैं। दोनों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया और फैसले आयोग के सामने बहुमत के आधार पर नहीं रखे गए।
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