नाबालिगों के लिए फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर संभावित प्रतिबंध को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके (Abhijit Deepak) ने नाराजगी जताई है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की ओर से उठाए गए सवाल और केंद्र सरकार के रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘जेन अल्फा को चुप करने की कोशिश’ बताया। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से इस पहलू पर विचार करने को कहा कि नाबालिग सोशल मीडिया कंपनियों के साथ किसी तरह का कॉन्ट्रैक्ट करके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल न कर सकें। अदालत की यह टिप्पणी बच्चों और किशोरों की सोशल मीडिया तक पहुंच को लेकर चल रही बहस के बीच आई है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता एनजीओ ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस’ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का की दलीलों का संज्ञान लिया। पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि “भारत में हमें कुछ सुरक्षा उपायों की जरूरत है।” अदालत ने केंद्र से इस संबंध में अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को पीठ के समक्ष कहा कि इस मुद्दे पर कुछ कदम उठाए जा सकते हैं और उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में दोबारा अदालत के समक्ष आना होगा। यह मामला नाबालिगों के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं के बीच सामने आया है। याचिका में बच्चों और किशोरों को सोशल मीडिया के संभावित नुकसान से बचाने के लिए सुरक्षा उपायों की जरूरत पर जोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम, युवाओं के लिए सवाल उठाने और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी बात रखने का एक मंच बन गया है। दीपके ने कहा, “भाजपा ने पिछले सालों में मेनस्ट्रीम मीडिया और वॉट्सऐप के जरिए नैरेटिव को कंट्रोल किया। लेकिन इंस्टाग्राम युद्ध का अलग मैदान है।” उन्होंने दावा किया कि जेन जी ने इंस्टाग्राम का इस्तेमाल सवाल पूछने, मजाक करने और राजनीतिक प्रचार को चुनौती देने के लिए किया। उन्होंने आगे कहा कि अब जेनरेशन अल्फा ऑनलाइन उम्र में आ रही है, ऐसे में नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर किए जा रहे प्रयासों को लेकर भी बहस होनी चाहिए।
नाबालिगों के सोशल मीडिया प्रतिबंध पर दीपके का बयान
अभिजीत दीपके ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन सुरक्षा के नाम पर नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की बजाय इंटरनेट को सुरक्षित बनाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। दीपके ने कहा कि ऑनलाइन सेफ्टी के नाम पर नाबालिगों पर प्रतिबंध लगाना कागज पर उचित लग सकता है, लेकिन इसके पीछे किसी अन्य मंशा पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि जेनरेशन अल्फा को उन गतिविधियों से रोकने की कोशिश नहीं होनी चाहिए, जो जेनरेशन जी ने की हैं। उन्होंने दावा किया कि 15-16 साल की उम्र के बच्चे भी प्रधानमंत्री और सत्ता में बैठे लोगों पर सोशल मीडिया के जरिए सवाल उठाते और मजाक करते हैं। दीपके के मुताबिक, अगर सरकार वास्तव में युवाओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित है तो उसे इंटरनेट को सुरक्षित बनाने के उपायों पर ध्यान देना चाहिए। दीपके ने ऑनलाइन लड़कियों को गाली देने और परेशान करने वाले अकाउंट्स पर कार्रवाई की बात कही। उन्होंने कहा कि ऐसे अकाउंट्स को बंद करने से शुरुआत होनी चाहिए, न कि पूरे जेनरेशन को सोशल मीडिया से दूर करने की कोशिश की जानी चाहिए।
सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
दीपके ने दावा किया कि सरकार की अपील पर मेटा की ओर से सरकार की आलोचना करने वाली सामग्री हटाई जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सिस्टम की विफलताओं को उजागर करने वाले कई कंटेंट क्रिएटर्स के अकाउंट बंद किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके नजरिए से नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रस्तावित प्रतिबंध का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा से कम और पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री की सावधानीपूर्वक गढ़ी गई छवि को बचाने से अधिक जुड़ा हुआ प्रतीत होता है।
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